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jasbir - Author on ShareChat
jasbir
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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek u Hixu Guru Ji पुत्तर मन कभी भी किसी का तृप्त नही हुआ, ऐसा सुना है मैने सदा। मन कभी भी तृप्त नही होता , मन का होना ही प्यास है। अतृप्ति होना मन का स्वभाव है। मन तृप्त नहीं हो सकता है। इसीलिए तो संसार में कोई तृप्ति नहीं है, क्योंकि संसार मन का फैलाव है। मन का विस्तार है। कि मेन को तृप्त कैसे करें ? पुत्तर अब प्रश्न उठता है मन से मुक्त होना। जब तक मन मन को तृप्त करने का एक ही तरीका हमें मन से ऊपर ; होगा , और अपने तब तक अतृप्ति रहेगी। इसलिए ' उठना असली स्वरूप को पहचानना होगा। ध्यान और आत्म ज्ञान के द्वारा हम मन से मुक्त हो सकते हैं, और अपने असली स्वरूप को पहचान सकते है। जब हम अपने असली स्वरूप को पहचान हैं मन की अतृप्ति समाप्त हो जाती है, और हम तृप्त हो जाते हैं।मन को तृप्त करने का तरीका है - मन से मुक्त होना, और अपने असली स्वरूप को पहचानना| नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 Eek u Hixu Guru Ji पुत्तर मन कभी भी किसी का तृप्त नही हुआ, ऐसा सुना है मैने सदा। मन कभी भी तृप्त नही होता , मन का होना ही प्यास है। अतृप्ति होना मन का स्वभाव है। मन तृप्त नहीं हो सकता है। इसीलिए तो संसार में कोई तृप्ति नहीं है, क्योंकि संसार मन का फैलाव है। मन का विस्तार है। कि मेन को तृप्त कैसे करें ? पुत्तर अब प्रश्न उठता है मन से मुक्त होना। जब तक मन मन को तृप्त करने का एक ही तरीका हमें मन से ऊपर ; होगा , और अपने तब तक अतृप्ति रहेगी। इसलिए ' उठना असली स्वरूप को पहचानना होगा। ध्यान और आत्म ज्ञान के द्वारा हम मन से मुक्त हो सकते हैं, और अपने असली स्वरूप को पहचान सकते है। जब हम अपने असली स्वरूप को पहचान हैं मन की अतृप्ति समाप्त हो जाती है, और हम तृप्त हो जाते हैं।मन को तृप्त करने का तरीका है - मन से मुक्त होना, और अपने असली स्वरूप को पहचानना| नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Cek Tu Hi Tu Gwww Ji पुत्तर प्रेम हमारे जीवन का वास्तविक और शाश्वत स्वभाव है   यह सूर्य की भांति सदैव विद्यमान रहता है। इसके विपरीत , नफरत उन काले बादलों की तरह है जो प्रेम के प्रकाश को ढक लेती है। घृणा केवल ' दूसरों है, जबकि सच्चा प्रेम दूसरों के सुख और जीवन की का विनाश ' चाहती ' कामना करता है। पुत्तर अक्सर हम जिसे हम सामान्य रूप में प्यार समझते हैं, वह स्वार्थ और अपेक्षाओं से भरा होता हैl जब हम किसी को केवल अपने स्वार्थ का जरिया बना लेते हैं, तो वही नफरत का कारण बन जाता हैl लेकिन जैसे ही मन से स्वार्थ और नफरत के बादल छंट जाते हैं, जीवन में ईश्वर रूपी शाश्वत प्रेम स्वयं प्रकट हो जाता है। ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ७
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    #Eek Tu Hi Guru Ji
    73 Eek TuHi u Guru Ji पुत्तर मन कभी भी किसी का तृप्त नही हुआ, ऐसा सुना है मैने सदा। मन कभी भी तृप्त नही होता , मन का होना ही प्यास है। अतृप्ति होना मन का स्वभाव है। मन तृप्त नहीं हो सकता है। इसीलिए तो संसार में कोई तृप्ति नहीं है, क्योंकि संसार मन का फैलाव है। मन का विस्तार है। है कि मेन को तृप्त कैसे करें ? पुत्तर अब प्रश्न उठता होना। जब तक मन है से मुक्त मन को तृप्त करने का एक ही तरीका . मन हमें मन से ऊपर उठना होगा, और अपने तब तक अतृप्ति रहेगी। इसलिए, असली स्वरूप को पहचानना होगा। हम मन से मुक्त हो सकते हैं, और अपने असली के द्वारा ध्यान और आत्म ज्ञान जब हम अपने असली स्वरूप को पहचान   हैं॰ तो स्वरूप को पहचान सकते हैं। समाप्त हो जाती है, और हम तृप्त हो जाते हैं।मन को तृप्त मन की 3ஏf9 होना, और अपने असली स्वरूप को से मुक्त ' करने का तरीका है ' मन पहचानना| ३ँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय फ 73 Eek TuHi u Guru Ji पुत्तर मन कभी भी किसी का तृप्त नही हुआ, ऐसा सुना है मैने सदा। मन कभी भी तृप्त नही होता , मन का होना ही प्यास है। अतृप्ति होना मन का स्वभाव है। मन तृप्त नहीं हो सकता है। इसीलिए तो संसार में कोई तृप्ति नहीं है, क्योंकि संसार मन का फैलाव है। मन का विस्तार है। है कि मेन को तृप्त कैसे करें ? पुत्तर अब प्रश्न उठता होना। जब तक मन है से मुक्त मन को तृप्त करने का एक ही तरीका . मन हमें मन से ऊपर उठना होगा, और अपने तब तक अतृप्ति रहेगी। इसलिए, असली स्वरूप को पहचानना होगा। हम मन से मुक्त हो सकते हैं, और अपने असली के द्वारा ध्यान और आत्म ज्ञान जब हम अपने असली स्वरूप को पहचान   हैं॰ तो स्वरूप को पहचान सकते हैं। समाप्त हो जाती है, और हम तृप्त हो जाते हैं।मन को तृप्त मन की 3ஏf9 होना, और अपने असली स्वरूप को से मुक्त ' करने का तरीका है ' मन पहचानना| ३ँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय फ
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Cele Tu HiTw Guhwdi पुत्तर सत्य को शब्दों से नहीं अनुभूति से जाना जाता है। सत्य कोई किताबी ज्ञान, विचारया भाषा का विषय नहीं है बल्कि मौन अनुभूति का विषय है शब्द केवल राह का इशारा हैं॰ मंजिल नहीं। इसको सूर्य और से समझा जा सकता है। जैसे आँगन में रखे हज़ारों घड़ों घड़ों के दृष्टांत के जल में एक ही सूर्य झिलमिलाता है। घड़ों के अलग ्अलग आकार से सूर्य नहीं बँटता, गंदे पानी से सूर्य गंदा नहीं होता और घड़ा पर टूटने सूर्य नष्ट नहीं होता। इसी तरह हमारेये नाम, रूप और शरीरों के आकार केवल मिट्टी के घडे़े हैं। अज्ञानता के कारण जीव खुद को घड़ा या उसका चंचल प्रतिबिंब (अहंकार) मानकर दुख भय और मृत्यु के भ्रम में जीता है। पुत्तर परम सत्य यही है कि सभी शरीरों के भीतर चमकने वाला चेतन प्रकाश अलग ्अलग नहीं है। वह एक ही अखंड परम ्तत्त्व (परमात्मा) है॰ जो सबमें साक्षी बनकर शरीररूपी घड़ों में एक साथ जगमगा रहा है। अतः शरीर रूपी घड़ों के पारजो अचल शांति और साक्षी भाव है वही आपका वास्तविक होना हैl Cele Tu HiTw Guhwdi पुत्तर सत्य को शब्दों से नहीं अनुभूति से जाना जाता है। सत्य कोई किताबी ज्ञान, विचारया भाषा का विषय नहीं है बल्कि मौन अनुभूति का विषय है शब्द केवल राह का इशारा हैं॰ मंजिल नहीं। इसको सूर्य और से समझा जा सकता है। जैसे आँगन में रखे हज़ारों घड़ों घड़ों के दृष्टांत के जल में एक ही सूर्य झिलमिलाता है। घड़ों के अलग ्अलग आकार से सूर्य नहीं बँटता, गंदे पानी से सूर्य गंदा नहीं होता और घड़ा पर टूटने सूर्य नष्ट नहीं होता। इसी तरह हमारेये नाम, रूप और शरीरों के आकार केवल मिट्टी के घडे़े हैं। अज्ञानता के कारण जीव खुद को घड़ा या उसका चंचल प्रतिबिंब (अहंकार) मानकर दुख भय और मृत्यु के भ्रम में जीता है। पुत्तर परम सत्य यही है कि सभी शरीरों के भीतर चमकने वाला चेतन प्रकाश अलग ्अलग नहीं है। वह एक ही अखंड परम ्तत्त्व (परमात्मा) है॰ जो सबमें साक्षी बनकर शरीररूपी घड़ों में एक साथ जगमगा रहा है। अतः शरीर रूपी घड़ों के पारजो अचल शांति और साक्षी भाव है वही आपका वास्तविक होना हैl
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    GURU JI BEK எu HI Tu पुत्तर, मेरा सबसे पहला काम ही तेरे मन को सा़फ करना है, क्योंकि संतमत का रास्ता मन से होकर जाता है। मन ही क्यों? क्योंकि दरवाज़ा वही है। आत्मा तो पहले को हर  से ही मुक्त है, परमात्मा का अंश है। लेकिन आत्मा ' अनुभव मन के पर्दे से ही होता है! जैसे धूप सा़फ है, पर खिड़की गंदी हो तो कमरा अँधेरा लगता है। खिड़की सा़फ करो   धूप अपने आप आ जाएगी .. मन वही खिड़की है। संसार का सुख दुख, कुछ मन से ही तो महसूस करते हैंl इसलिए मैं सबसे भजन सिमरन, सत्संग - सब पहले मन को ठीक करता हूँ! मन ही बंधन है, मन ही मुक्ति। जब मन सध ' जाए तो क्या होता है?...इंसान छोटी छोटी बातों पर विचलित नहीं होता। क्रोध कम और धैर्य ज़्यादा होने लगता है। सिमरन में रस आने लगता है। अपनी मंज़िल हमेशा याद रहती है। इसलिए मन सुधरा , तो समझो सब कुछ सुधर गया! ऊँ नमः शिवाय , शिव जी सदा सहाय! ४ GURU JI BEK எu HI Tu पुत्तर, मेरा सबसे पहला काम ही तेरे मन को सा़फ करना है, क्योंकि संतमत का रास्ता मन से होकर जाता है। मन ही क्यों? क्योंकि दरवाज़ा वही है। आत्मा तो पहले को हर  से ही मुक्त है, परमात्मा का अंश है। लेकिन आत्मा ' अनुभव मन के पर्दे से ही होता है! जैसे धूप सा़फ है, पर खिड़की गंदी हो तो कमरा अँधेरा लगता है। खिड़की सा़फ करो   धूप अपने आप आ जाएगी .. मन वही खिड़की है। संसार का सुख दुख, कुछ मन से ही तो महसूस करते हैंl इसलिए मैं सबसे भजन सिमरन, सत्संग - सब पहले मन को ठीक करता हूँ! मन ही बंधन है, मन ही मुक्ति। जब मन सध ' जाए तो क्या होता है?...इंसान छोटी छोटी बातों पर विचलित नहीं होता। क्रोध कम और धैर्य ज़्यादा होने लगता है। सिमरन में रस आने लगता है। अपनी मंज़िल हमेशा याद रहती है। इसलिए मन सुधरा , तो समझो सब कुछ सुधर गया! ऊँ नमः शिवाय , शिव जी सदा सहाय! ४
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    HS 39 নসঃ EEKTU MIDU-GURU JI तुम्हारे डर को अपने मन मे बैठे डर से बनाया पुत्तर जिस परमात्मा नू तुमने ` d8 कैसे समाप्त करेगा? तुम डरते थे   मौत से, बीमारी से, अकाल से, गरीबी से, और अकेलेपन से। फिर तुमने एक अदृश्य शक्ति गढ़ ली और कहा- असफलता वह ऊपर बैठा सब देख रहा है। तुम्हें थोड़ी राहत मिली। फिर तुमने उसके मंदिर मस्जिद बनाई, तो किसी ने चर्च बनाया। लेकिन जब कठिन बनाए॰ किसी परिस्थितियाँ आईं॰ तब मनुष्य पहली बार देखा कि उसकी बनाई हुई धार्मिक दीवारें कितनी कमजोर हैंl बाढ़ आई= मंदिर और मस्जिद दोनों पानी में डूब गए..!!भूकंप आया = ईश्वर के घर भी मलबे में बदल गए...!! भूख आई= प्रवचन पेट नहीं भर सके...!! बेरोज़गारी आई॰ मंत्र नौकरी तस्वीर साफ़ हुई और आदमी ने देखा कि नहीं दिला सके...| विश्वास और उसकी वास्तविकता दो अलग चीजें हैंl उसका पुत्तर तुम धर्म को मत पकड़ो, सत्य को खोजो। किसी के शब्दों पर मत रुको , अपने अनुभव तक जाओ। जिस दिन तुमने स्वयं सत्य को छू लिया, उस दिन न मंदिर की जरूरत होगी, न मस्जिद की और न किसी साँस ही प्रार्थना होगी, दीवार की। तब जागरूकता ही तुम्हारी तुम्हारी पूजा होगी और तुम्हारा जीवन ही मंदिर, और यदि वह सत्य अभी नहीं मिला है=तो कम ्से॰्कम उसे खोजने की ईमानदारी तो पैदा करो क्योंकि सबसे बड़ा अधर्म ईश्वर को न मानना नहीं, बल्कि बिना जाने मान लेना है। HS 39 নসঃ EEKTU MIDU-GURU JI तुम्हारे डर को अपने मन मे बैठे डर से बनाया पुत्तर जिस परमात्मा नू तुमने ` d8 कैसे समाप्त करेगा? तुम डरते थे   मौत से, बीमारी से, अकाल से, गरीबी से, और अकेलेपन से। फिर तुमने एक अदृश्य शक्ति गढ़ ली और कहा- असफलता वह ऊपर बैठा सब देख रहा है। तुम्हें थोड़ी राहत मिली। फिर तुमने उसके मंदिर मस्जिद बनाई, तो किसी ने चर्च बनाया। लेकिन जब कठिन बनाए॰ किसी परिस्थितियाँ आईं॰ तब मनुष्य पहली बार देखा कि उसकी बनाई हुई धार्मिक दीवारें कितनी कमजोर हैंl बाढ़ आई= मंदिर और मस्जिद दोनों पानी में डूब गए..!!भूकंप आया = ईश्वर के घर भी मलबे में बदल गए...!! भूख आई= प्रवचन पेट नहीं भर सके...!! बेरोज़गारी आई॰ मंत्र नौकरी तस्वीर साफ़ हुई और आदमी ने देखा कि नहीं दिला सके...| विश्वास और उसकी वास्तविकता दो अलग चीजें हैंl उसका पुत्तर तुम धर्म को मत पकड़ो, सत्य को खोजो। किसी के शब्दों पर मत रुको , अपने अनुभव तक जाओ। जिस दिन तुमने स्वयं सत्य को छू लिया, उस दिन न मंदिर की जरूरत होगी, न मस्जिद की और न किसी साँस ही प्रार्थना होगी, दीवार की। तब जागरूकता ही तुम्हारी तुम्हारी पूजा होगी और तुम्हारा जीवन ही मंदिर, और यदि वह सत्य अभी नहीं मिला है=तो कम ्से॰्कम उसे खोजने की ईमानदारी तो पैदा करो क्योंकि सबसे बड़ा अधर्म ईश्वर को न मानना नहीं, बल्कि बिना जाने मान लेना है।
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  • mamta goswami - Author on ShareChat
    mamta goswami 💓💓💖
    #mere Guru ji
    RAHy ' Mty इंसान का सब्र तब ट्ूट जाता है जब उसकी हजार कोशिशों के बादभी॰ उसका मनपसंद शख़्स उसकी कोई अहमियत नहीं समझता RAHy ' Mty इंसान का सब्र तब ट्ूट जाता है जब उसकी हजार कोशिशों के बादभी॰ उसका मनपसंद शख़्स उसकी कोई अहमियत नहीं समझता
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    @ T@nt67@ Gu 18 वेख पुत्तर, जद तक बंदा अपने बारे विच दावे करदा रहंदा है  कि मैं ही सब कुछ हूँ, मेरी कोई वड्डी पहचान है, ओही दावा ओह्दे अहंकार दी भित्ति (दीवार ) बन जांदा है। सच्चा जीवन तां उदों शुरू हुंदा है, जद है। ओ बंदा अपने सारे दावे छड्ड देंदा न कोई दावा, न कोई पहचान दा मतलब समझ पुत्तर   हुण मैं किसे नाम , पद, धर्म या विचारनाल बंधिया नहीं हाँ। मैं बस एक साक्षी हाँ, बस ओही! इहो इस महान अस्तित्व दा एक छोटा सा हिस्सा। जो है पूर्ण स्वीकृति दी अवस्था है। < इहो सच्चा समर्पण है पुत्तर। एह कोई हार नहीं , बल्कि अहंकार दा विलय है। नूं उंवें ही स्वीकार कर लेंदा है जैसा ओह है, तां जद मनुष्य जीवन ओह्दे अंदर एक अद्भुत शांति जन्म लेंदी है। फिर न कोई शिकायत रहंदी है, न कोई संघर्ष। और ओही क्षण अस्तित्व अपने सारे रहस्य खोलण लग जांदा है। इस करके पुत्तर , स्वीकार ही ध्यान दा असली द्वार है। जो है, ओह्नूं पूरी तरह स्वीकार कर लै, फिर उस्दा जीवन अपन आप एक उत्सव बन जावगा | ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 @ T@nt67@ Gu 18 वेख पुत्तर, जद तक बंदा अपने बारे विच दावे करदा रहंदा है  कि मैं ही सब कुछ हूँ, मेरी कोई वड्डी पहचान है, ओही दावा ओह्दे अहंकार दी भित्ति (दीवार ) बन जांदा है। सच्चा जीवन तां उदों शुरू हुंदा है, जद है। ओ बंदा अपने सारे दावे छड्ड देंदा न कोई दावा, न कोई पहचान दा मतलब समझ पुत्तर   हुण मैं किसे नाम , पद, धर्म या विचारनाल बंधिया नहीं हाँ। मैं बस एक साक्षी हाँ, बस ओही! इहो इस महान अस्तित्व दा एक छोटा सा हिस्सा। जो है पूर्ण स्वीकृति दी अवस्था है। < इहो सच्चा समर्पण है पुत्तर। एह कोई हार नहीं , बल्कि अहंकार दा विलय है। नूं उंवें ही स्वीकार कर लेंदा है जैसा ओह है, तां जद मनुष्य जीवन ओह्दे अंदर एक अद्भुत शांति जन्म लेंदी है। फिर न कोई शिकायत रहंदी है, न कोई संघर्ष। और ओही क्षण अस्तित्व अपने सारे रहस्य खोलण लग जांदा है। इस करके पुत्तर , स्वीकार ही ध्यान दा असली द्वार है। जो है, ओह्नूं पूरी तरह स्वीकार कर लै, फिर उस्दा जीवन अपन आप एक उत्सव बन जावगा | ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    eek TU HT (GUIR Tu JI हे गुरु जी देने वाले भी आप हैं, खिलाने वाले भी आप, पालन करने वाले भी आप हैं और यहाँ तक खींच कर लाने वाले भी आप..!!आपका सहस्रों शुक्र है मेरे दाता, जो हर मुसीबत में मुझे बचा लेते हैं  !! गुरु जी मैं सुकून की दौलत कहाँ से ढूँढ कर लाऊँ? मैं तो हर रोज़ आपके चरणों में ही अपनी सुबह तलाश आपसे दूर होकर यह कैसी घड़ी आ पड़ी है कि अब हर चेहरे में मुझे करता हू आपका ही अक्स नज़र आता है..!! सत्य की राह किसी और के पदचिह्नों पर चलने से नहीं, बल्कि आप के बताये पदचिह्नों पर चलने से मिलती है...!! ओम नमः शिवाय गुरु जी सदा सहाय।] eek TU HT (GUIR Tu JI हे गुरु जी देने वाले भी आप हैं, खिलाने वाले भी आप, पालन करने वाले भी आप हैं और यहाँ तक खींच कर लाने वाले भी आप..!!आपका सहस्रों शुक्र है मेरे दाता, जो हर मुसीबत में मुझे बचा लेते हैं  !! गुरु जी मैं सुकून की दौलत कहाँ से ढूँढ कर लाऊँ? मैं तो हर रोज़ आपके चरणों में ही अपनी सुबह तलाश आपसे दूर होकर यह कैसी घड़ी आ पड़ी है कि अब हर चेहरे में मुझे करता हू आपका ही अक्स नज़र आता है..!! सत्य की राह किसी और के पदचिह्नों पर चलने से नहीं, बल्कि आप के बताये पदचिह्नों पर चलने से मिलती है...!! ओम नमः शिवाय गुरु जी सदा सहाय।]
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    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Eek Tu Hi Guru Ji
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