sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४२/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 गतांक से आगे कर्म- भक्ति - ज्ञान योग समन्वय: *निष्काम भाव से कर्म करने वालों के जीवन में भक्ति और ज्ञान स्वत: प्रकट हो जाते हैं और उन्हें मन शुद्धि का फल अनायास ही मिल जाता है।* *महाभारत में तुलाधार वैश्य की एक कथा आती है । निजली नामक एक ब्राह्मण जब ग्याग लेने के लिए तुलाधार वैश्य के पास आता है तब तुलाधार उससे कहता है कि ,,, भाई मेरे पास एक ही ज्ञान है ,, जो मैंने अपनी तराजू की डंडी में से प्राप्त किया है। मेरी तराजू की डंडी जिस प्रकार पक्षपात रहित, स्थिर और सीधी रहती है , उसी प्रकार में भी मित्र - शत्रु अपने- पराए सभी के प्रति अपने मन को स्थिर और निष्पक्ष (पक्षपात रहित ) रखता हूं ।* *सेना नाई, गोरा कुमार, सांवता माली , मोमिन, जाति के जुलाहे कबीर आदि ने अपने-अपने कर्म मार्ग में स्थिर रहकर भक्ति मार्ग और ज्ञान- मार्ग की यात्रा की तथा मोक्ष प्राप्त किया ।* *सेना नाई ने लोगो के बाल काट कर और उनके सिर का मैल साफ करके अपने सिर (मस्तिक) से मैल (विषय- विकार ) दूर किया ।* *गोरा कुम्हार ने मटके पकाते- पकाते अपना जीवन रूपी मटका पका लिया । सावता माली ने उसके बगीचे में उगे अनुपयोगी घास - फूस को साफ करते करते अपने अंतकरण में उगे काम ,क्रोध, राग , द्वेष एवं उपद्रव रूपी, वासना रूपी , घास-फूस को उखाड फैका।* *कबीर के वस्त्रो की बुनाई करते-करते अपने अंतकरण के पट (वस्त्र ) और जीवन रूपी वस्त्र को व्यवस्थित ढंग से बुना और वह वस्त्र परमात्मा को समर्पित कर दिया।* *दादू धुनिया कपास धुनने का काम करता था । उसकी धुनाई की क्रिया में " तूई तूई " आवाज आती थी और दादू के मुख से "तू ही तू ही "आवाज निकलती थी इसी का नाम कर्मयोग ,भक्तियोग , ज्ञान योग का समन्वय है।* क्रमश: ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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