sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४२/२ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 कर्म -भक्ति - ज्ञान योग समन्वय: गतांक से आगे एक विद्यार्थी को परीक्षा में "गधे " पर निबंध लिखने को कहा जाए तो वह निबंध लिखने की क्रिया उसका कर्म योग कहलाएगा । *लिखते समय कागज का आगे का हिस्सा छोड़कर व सुंदर अक्षरों में निबंध लिखें और कहीं भी धब्बा न पड़ने दें तो यह उसका भक्तियोग कहलाएगा ।* *इसके बाद गधे के दो लंबे कान होते हैं , चार पैर होते हैं, एक पूछ होती है , आदि यथार्थ सूचना लिखें तो यह उसका ज्ञानयोग कहलाएगा।* *इस प्रकार कर्मयोग , ज्ञानयोग , भक्तियोग तीनों का समन्वय होगा तो ही उसे दस में से नौ अंक मिलेंगे , अन्यथा नहीं मिलेंगे।* *विद्यार्थी गधे पर निबंध लिखने का कर्मयोग करें , किंतु कागज का आगे का हिस्सा खाली न रखें , गंदे अक्षरों में लिखे , कागज पर धब्बे पड़े अर्थात उसमें भक्तियोग न हो या गधे के संबंध में उसे सही जानकारी न हो अर्थात ज्ञानयोग न हो अथवा भक्तियोग, ज्ञानयोग हो , किंतु कर्मयोग ही न हो अर्थात परीक्षा पेपर कोरा रखकर आए तो वह अनुत्तीर्ण ही होगा ।* *ऐसा ही जीव के प्रत्येक कर्म में समझना चाहिए।* *मेरा कपड़ा (अंतरपट) मैला है , मुझे उस को स्वच्छ बनाना हो , मैं उसमें केवल साबुन (ज्ञानयोग) घिसू तो कपड़ा फट जाएगा । इसी प्रकार शुष्क वेदांत भी अंतरपट के टुकड़े-टुकड़े कर देता है और व्यक्ति को सिर्फ वेदांती बना देता है । मुझे पहले तो अंतरपट (कपड़े) को भक्ति की सरलता में भिगोना पड़ेगा, फिर उसमें ज्ञानयोग का साबुन लगाना पड़ेगा और उसके बाद उस पर कर्मयोग की चोट करनी पड़ेगी , तब ही कपड़ा ( अंत:करण) शुद्ध होगा ।* *गीता में ऐसे बहुत से सारे गूढ रहस्य हैं । उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण से अर्थघठन करके जीवन जीने की कला सीखनी है । केवल मरने की राह देख कर बैठे वृद्ध और साधू सन्यासियों के लिए गीता नहीं लिखी गई है।* क्रमश: कल इससे आगे पड़ेंगे ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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