sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_३१/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 ज्ञानाग्नि कैसे प्रकट होती है ? गतांक से आगे(विश्राम) (वैसे ही जागृत अवस्था में सुख-दुख आदि जागृत अवस्था में सत्य है किंतु ज्ञान अवस्था में मिथ्या हो जाते हैं) *कोई व्यक्ति रात को खीर पूरी मिष्ठान आदि खाकर सोए , और फिर सपना अवस्था में " मैं भूखा हूं, मैं भूखा हूं " कहते हुए पूरी रात भिक्षा पात्र लेकर भीख मांगे । उस समय खुद शंकराचार्य जी भी उसे समझाये कि " अरे अज्ञानी जीव, तू भूखा नहीं है , तू भोजन करके सोया था । फिर भी वह व्यक्ति उसकी बात नहीं मानेगा ।* *किंतु जब वह जागृत अवस्था में आएगा तब उसे सच्चे स्वरूप का ज्ञान होगा। वैसे ही जागृत अवस्था में हम लोग अज्ञानता से घिरे हुए हैं। ऐसे जीवो को शास्त्र और संत पुकार पुकार कर कहते हैं कि "यह जगत मिथ्या है और ब्रह्म ही सत्य है " तू ब्रह्म का अंश सत चित और आनंद स्वरूप है"। फिर भी दुर्भागी जीव शास्त्रों और संतो की बात नहीं मानता है । क्योंकि वह जागृत अवस्था से ज्ञान अवस्था में नहीं आया है ।* *शंकराचार्य जी ने अनेक ग्रंथों का सार केवल इस आधे श्लोक मे कह दिया है कि---* *श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ग्रंथकोटिभि:।* *ब्रह्मसत्यं जगत् मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापर:॥* *उपरोक्त दृष्टांत की तरह दस साल की सजा में से तीन साल की सजा भोगने के बाद सच्चा ज्ञान होने पर शेष सात वर्ष की सजा खत्म हो जाती है , वैसे ही जीव को अपने सत् - चित्त- आनंद स्वरूप का सच्चा ज्ञान होते ही उसके अनादिकाल के एकत्रित हुए अरबों खरबों जन्मों के संचित कर्म तत्काल खत्म हो जाते हैं।* *इसलिए जैसे क्रियमाण कर्मों को नियंत्रण करने के लिए कर्म- मार्ग है , प्रारब्ध को आसानी से भोगने के लिए भक्ति - मार्ग है , उसी तरह संचित कर्मों को समाप्त करने के लिए ज्ञान -मार्ग है । इन्ही तीनों मार्गो से जीव अपने जन्म की जीवन यात्रा पूर्ण कर के अंत में मोक्ष प्राप्त कर सकता है और जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।* क्रमश कल से अब एक नए भाग के साथ ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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