sn vyas
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# श्रीमद्भागवत - महापुराण “कलियुग की शुरुआत” 🌸📖 🌸📖 कलियुग की शुरुआत कैसे हुई? (श्रीमद्भागवत के अनुसार) ✨ “जब भगवान पृथ्वी से जाते हैं, तब धर्म धीरे-धीरे क्षीण होने लगता है” श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, कलियुग की शुरुआत कोई अचानक घटना नहीं थी, बल्कि यह एक क्रमिक परिवर्तन था—जो भगवान के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद आरंभ हुआ। --- 🌿 द्वापर युग का अंत और श्री कृष्ण का प्रस्थान जब श्री कृष्ण ने अपनी लीला पूर्ण की और पृथ्वी से अपने दिव्य धाम को प्रस्थान किया, तभी से द्वापर युग का अंत हो गया। 👉 यही क्षण था जब कलियुग का प्रवेश प्रारंभ हुआ। भगवान के रहते हुए धर्म, सत्य और न्याय का संतुलन बना रहता है, लेकिन उनके जाने के बाद अधर्म धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। --- 🌿 राजा परीक्षित और कलियुग का आगमन कलियुग के आरंभ में राजा परीक्षित शासन कर रहे थे— जो महान धर्मात्मा और अर्जुन के पौत्र थे। एक दिन उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति (जो वास्तव में कलियुग था) 👉 गाय (धर्म) और बैल (सत्य) को मार रहा है 😔 राजा परीक्षित ने तुरंत उसे रोक लिया और दंड देने लगे। तब कलियुग ने उनसे प्रार्थना की— 👉 “हे राजा, मुझे भी इस संसार में रहने का स्थान दें” --- 🌿 कलियुग को मिले 5 स्थान राजा परीक्षित ने पहले तो मना किया, लेकिन फिर दया करके उसे कुछ स्थान रहने के लिए दिए— 👉 जुआ (Gambling) 👉 मदिरा (Intoxication) 👉 व्यभिचार (Illicit relations) 👉 हिंसा (Violence) 👉 और अंत में — सोना (Gold / लालच) यही वे स्थान हैं जहाँ कलियुग सबसे अधिक प्रभावी होता है। --- 🌿 धर्म के चार स्तंभों का क्षय सत्य, दया, तप और शौच—ये धर्म के चार स्तंभ माने जाते हैं। सतयुग में ये चारों पूर्ण थे त्रेता में एक कम हुआ द्वापर में दो और कलियुग में केवल सत्य का एक अंश ही शेष रह जाता है 👉 इसलिए कलियुग में झूठ, कपट और स्वार्थ बढ़ जाते हैं --- 🌿 कलियुग की विशेषताएँ श्रीमद्भागवत में बताया गया है कि कलियुग में— - लोग धन को ही सब कुछ मानेंगे - रिश्ते स्वार्थ पर आधारित होंगे - धर्म केवल दिखावा बन जाएगा - आयु, बल और स्मरण शक्ति कम होगी - झूठ और कपट सामान्य हो जाएगा --- 🌿 लेकिन एक महान वरदान भी है कलियुग जितना कठिन है, उतना ही सरल भी… 👉 इस युग में केवल भगवान का नाम जप ही मुक्ति का मार्ग है न कठोर तपस्या, न यज्ञ— 👉 केवल सच्चे मन से नाम स्मरण ही पर्याप्त है --- 🌼 गहरा संदेश: 👉 कलियुग बुरा नहीं, बल्कि परीक्षा का युग है 👉 जो व्यक्ति भक्ति में स्थिर रहता है, वही सच्चा विजेता है 👉 और सबसे बड़ा साधन है—भगवान का नाम🙏 जय श्री कृष्ण 🌸
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