sn vyas
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#कर्म #कर्म ही पूजा है 🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२७/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 नाम - स्मरण-- राम नाम का जप प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करता है ?🦚 *अखा भगत सच कहता है कि---* *तिलक करता त्रेपन भया, जप माला नाका गया।* *कथा सुनी सुनी फुटिया कान, तोय न आव्यु ब्रह्म ज्ञान॥* *(अर्थात --- तिलक करते-करते 53 साल बीत गए। जपमाला के छेद भी बड़े हो गए । कथा सुनते सुनते कान बहरे हो गए , फिर भी ब्रह्म ज्ञान नहीं मिला।)* *एक मूरख ने एवी टेव, पत्थर एटला पूजे देव।* *तुलसी देखी तोड़े पान , पानी देखी करें स्नान॥* *(अर्थात-- एक मूर्ख को ऐसी आदत थी कि जितने पत्थर देखें ,उसको भगवान समझकर पूजन करें , तुलसी देखकर पत्ते तोड़ने लगे ,और पानी देखकर स्नान करने लगे।* *फिर भी उसका भव रोग मिटेगा नहीं , क्योंकि वह उपरोक्त परहेज का पालन करें तो उसको रोग होगा ही नहीं। इसलिए दवाई कि उसको आवश्यकता ही नहीं रहेगी।* *और परहेज का पालन नहीं करता तो फिर दवाई लेने की भी आवश्यकता नहीं । क्योंकि दवाई उसे कोई फायदा ही नहीं देगी ,, उपरोक्त परहेजी का अगर ठीक ढंग से पालन करता है तो,, राम नाम लो ,, या ना लो ,, दोनों समान। कुत्ते, बिल्ली , घोड़े , गधे , पशु, पक्षी ,चींटी ,मकोड़े आदि राम नाम नहीं लेते ,, किंतु सब जीवो पर भगवान की तो बराबर एक जैसी ही कृपा रहती है* *भक्त कवि आगे एक दूसरी जबरदस्त परहेज बताता है वह परेज इस तरह है---* *मैं हरि का हरि मेरे रक्षक, ये ही भरोसा नहीं जाए कभी।* *जो हरि करि है सो मेरे हित, यह निश्चय नहीं जाए कभी॥* *( अर्थात) मै हरि का ,, हरि है मेरा रक्षक ,, यह भरोसा जाए नहीं ,, जो हरि करेगा, वह मेरे हित के लिए ही करेगा ,, इस निश्चय में तब्दीली नहीं होनी चाहिए।* क्रमश: आगे अब नया भाग ✍🏽 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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