prakash pandit
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હું શેરચેટ ને પ્રેમ કરું છુ.
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat
#🧔 નરેન્દ્ર મોદી
🧔 નરેન્દ્ર મોદી - ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - अपने प्यार ही अपनी तबाही का मंजर होता है ये जवानी का जोश भी अजीब होता है दिल लगा बैठे तो फिर हौसला क्या रहता है आशिकी में हर कोई बस बेअसर होता है पलकों को आपस में मिलने का हक नहीं खुली  रात भर जिस की ख्वाहिश हो वही दिल का सफर होता है हँसते हँसते जिंदगी रुला देती है कभी कभी इश्क का दस्तूर ही थोड़ी सफर होता है ব্ধী নী মুননা ` कोई समझाए जो दिल নক্ী प्यार में हर शख्स बस थोड़ा बेफिक्र होता है अंत में बस इतना समझ आता है "विजय " जिसे चाहो वही दिल का हमसफर होता है प्रकाश पंडित अपने प्यार ही अपनी तबाही का मंजर होता है ये जवानी का जोश भी अजीब होता है दिल लगा बैठे तो फिर हौसला क्या रहता है आशिकी में हर कोई बस बेअसर होता है पलकों को आपस में मिलने का हक नहीं खुली  रात भर जिस की ख्वाहिश हो वही दिल का सफर होता है हँसते हँसते जिंदगी रुला देती है कभी कभी इश्क का दस्तूर ही थोड़ी सफर होता है ব্ধী নী মুননা ` कोई समझाए जो दिल নক্ী प्यार में हर शख्स बस थोड़ा बेफिक्र होता है अंत में बस इतना समझ आता है "विजय " जिसे चाहो वही दिल का हमसफर होता है प्रकाश पंडित - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - प्यार कर के बीच रास्ते में छोड़ दिया, कातिल थी सनम उसी ने मुझे मार दिया हाथों में हाथ लेकर जिसने वादे किए  , उसी हसीन ख्वाबों ने आखिर उजाड़ दिया मैं तो समझता रहा वफ़ा की दुनिया होगी, उसकी एक नज़र ने ही मुझे बेकार दिया  जिसने कहा था तू मेरा सदा साथ रहेगा, उसी वादे ने आज मुझे बेज़ार दिया दिल, रास्ते भी पूछते हैं अब कहाँ गया वो दीवाना  जिसने खुद को ही अपनी पहचान से हार दिया मैं आज भी उसी शहर में भटकता हूँ अकेला, जहाँ प्यार के नाम पर मुझे बस आघात दिया प्रकाश पंडित प्यार कर के बीच रास्ते में छोड़ दिया, कातिल थी सनम उसी ने मुझे मार दिया हाथों में हाथ लेकर जिसने वादे किए  , उसी हसीन ख्वाबों ने आखिर उजाड़ दिया मैं तो समझता रहा वफ़ा की दुनिया होगी, उसकी एक नज़र ने ही मुझे बेकार दिया  जिसने कहा था तू मेरा सदा साथ रहेगा, उसी वादे ने आज मुझे बेज़ार दिया दिल, रास्ते भी पूछते हैं अब कहाँ गया वो दीवाना  जिसने खुद को ही अपनी पहचान से हार दिया मैं आज भी उसी शहर में भटकता हूँ अकेला, जहाँ प्यार के नाम पर मुझे बस आघात दिया प्रकाश पंडित - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती  तड़पता है दिल ख़ामोश रातें भी अब सवाल करने लगी हैं, क्यों मेरी ज़िंदगी में तेरी सौगात नहीं होती तेरी यादों का मौसम हर रोज़ बरसता है फिर भी इन आँखों से बरसात नहीं होती मैं ढूँढता रहा तुझे हर एक अजनबी चेहरे में , पर तेरी तरह कोई भी मुलाकात नहीं होती दिल की दीवारों पर बस तेरा ही नाम लिखा है, मगर तेरे नाम की कोई बात नहीं होती वो जो कहता था कभी साथ नहीं छूटेगा , आज उसके लबों पर वो बात नहीं होती निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती तड़पता है दिल लिखित प्रकाश पंडित निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती  तड़पता है दिल ख़ामोश रातें भी अब सवाल करने लगी हैं, क्यों मेरी ज़िंदगी में तेरी सौगात नहीं होती तेरी यादों का मौसम हर रोज़ बरसता है फिर भी इन आँखों से बरसात नहीं होती मैं ढूँढता रहा तुझे हर एक अजनबी चेहरे में , पर तेरी तरह कोई भी मुलाकात नहीं होती दिल की दीवारों पर बस तेरा ही नाम लिखा है, मगर तेरे नाम की कोई बात नहीं होती वो जो कहता था कभी साथ नहीं छूटेगा , आज उसके लबों पर वो बात नहीं होती निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती तड़पता है दिल लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। वो जो कल तक अपने से लगते थे हमें , ही दूर आज उनसे जाना पडता है। रात भर यादों का साया चलता है नींद को भी अब समझाना पड़ता है। मिले हमें , हमने चाहा था सच्चा प्यार पर हर बार दिल को बहलाना पडता है। वक़्त की इस बेरहम दुनिया में देखो, खुद को हर रोज़ आज़माना पड़ता है। दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। नीचे लीजीतन प्रकाश पंडित दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। वो जो कल तक अपने से लगते थे हमें , ही दूर आज उनसे जाना पडता है। रात भर यादों का साया चलता है नींद को भी अब समझाना पड़ता है। मिले हमें , हमने चाहा था सच्चा प्यार पर हर बार दिल को बहलाना पडता है। वक़्त की इस बेरहम दुनिया में देखो, खुद को हर रोज़ आज़माना पड़ता है। दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। नीचे लीजीतन प्रकाश पंडित - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - %l Sdl sls , al (ec sl 3u4 8 3[21' পি&ot স২ GE/২t ২৫- 51 clesl { 3[থ[| HiGculd 5 2Gி4i GH ஒ{Sd 2G 3[வ[, a 244- uel Sl 215 %si & Ju ২৫ই 51 আ[২[২ী ২ী @২ 3[থ[, s2{d gসী . (C 51 dSu151 31IHId డ  [aI/ एभने तो Gनgो YुEI २HJ ४२ २I७। था, dl eभsो ५२ ६६ Sl निशi टे गथा | २Iतें szती २७ी Gनgी थl६ों ऐ सIथ , नी६ों डो शभी वो वि२Iन ४२ गथा | टसी से &८ GDIIने SU E८ नeीं s२ता, 2AC ৭ী {১২s ম 9ণ $  ২{০১া & 3[থ[| d(ud Asla u(Sd %l Sdl sls , al (ec sl 3u4 8 3[21' পি&ot স২ GE/২t ২৫- 51 clesl { 3[থ[| HiGculd 5 2Gி4i GH ஒ{Sd 2G 3[வ[, a 244- uel Sl 215 %si & Ju ২৫ই 51 আ[২[২ী ২ী @২ 3[থ[, s2{d gসী . (C 51 dSu151 31IHId డ  [aI/ एभने तो Gनgो YुEI २HJ ४२ २I७। था, dl eभsो ५२ ६६ Sl निशi टे गथा | २Iतें szती २७ी Gनgी थl६ों ऐ सIथ , नी६ों डो शभी वो वि२Iन ४२ गथा | टसी से &८ GDIIने SU E८ नeीं s२ता, 2AC ৭ী {১২s ম 9ণ $  ২{০১া & 3[থ[| d(ud Asla u(Sd - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - ೨Lc ते२े २१ाने शे lऊा२{ो भें नू२ २lI JIथा, 41lc sl %1s1 232 241 ou ८२ शIभ G६ासी भें गु%४२ %lती थी , ud ণু %1 ২[থা dী 9ণ 51 ২ু২২ ২া 3[থ[| (H ci r-(I8 s[ {582 213) ವ15 ೭, 12 aIdl21 Asloutd 51 2G2 హషI  [uII 35 ২৫ই - 54া 5HIG 5২ [Eথা [Ect 4২, 2[E೫] ಯIE 24i?ಭ4[ 51 ೧1 ಬ51 31l ೊ4LI ते२ ४६भों से भesने AIगी ७२ २ेs २७ , c[3[[ # হ২ী ২t[৭ণ 51 লু২ ২[ 3[2[| ஒ{Q dl G? qst வG (c 21 SPAl Hscp d2t 2{[& 2G < G? 3[4 &? 2{[ 3[4[/ (Qud ksta u(Sd ೨Lc ते२े २१ाने शे lऊा२{ो भें नू२ २lI JIथा, 41lc sl %1s1 232 241 ou ८२ शIभ G६ासी भें गु%४२ %lती थी , ud ণু %1 ২[থা dী 9ণ 51 ২ু২২ ২া 3[থ[| (H ci r-(I8 s[ {582 213) ವ15 ೭, 12 aIdl21 Asloutd 51 2G2 హషI  [uII 35 ২৫ই - 54া 5HIG 5২ [Eথা [Ect 4২, 2[E೫] ಯIE 24i?ಭ4[ 51 ೧1 ಬ51 31l ೊ4LI ते२ ४६भों से भesने AIगी ७२ २ेs २७ , c[3[[ # হ২ী ২t[৭ণ 51 লু২ ২[ 3[2[| ஒ{Q dl G? qst வG (c 21 SPAl Hscp d2t 2{[& 2G < G? 3[4 &? 2{[ 3[4[/ (Qud ksta u(Sd - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - 3[3১G २ेs भूकसू२त न%४२ ऐ धोड भें २४८ गथे ७भ, dl231 . (d$ 2[G? ~ u{( 2{ 3[& G4/ G241 02 215 0I2 Lಚ/2 21 5[ Eull, 2[Eu[ $ ವi೩ E2ಯ[o ut[ct ?1 312 (xl तGIश Gखे टसी २ौौ२ ७भ२३२ g्ी थी शIथ६, (२ लभी G२ट २l७ों भें २४ से गथे ७भ | qlG c{u{o{2 2Gl GH[? %ஒolal 21 43[2, G251 (2 cId u2 ఒiE2 21 22 21 [u (s1/ 215 44 8 yalulld Sl 24212 dl 8ul, Gभ्र ९२ ऐ ढिथे सी ऐ ७ो से गथे ७भ | :೬ 2112 52 ತ252l cq ತ, 3{0{ ప15 s20 ualot aI (8211' 2{ 3[& G4/ @alud us121 ylsd] 3[3১G २ेs भूकसू२त न%४२ ऐ धोड भें २४८ गथे ७भ, dl231 . (d$ 2[G? ~ u{( 2{ 3[& G4/ G241 02 215 0I2 Lಚ/2 21 5[ Eull, 2[Eu[ $ ವi೩ E2ಯ[o ut[ct ?1 312 (xl तGIश Gखे टसी २ौौ२ ७भ२३२ g्ी थी शIथ६, (२ लभी G२ट २l७ों भें २४ से गथे ७भ | qlG c{u{o{2 2Gl GH[? %ஒolal 21 43[2, G251 (2 cId u2 ఒiE2 21 22 21 [u (s1/ 215 44 8 yalulld Sl 24212 dl 8ul, Gभ्र ९२ ऐ ढिथे सी ऐ ७ो से गथे ७भ | :೬ 2112 52 ತ252l cq ತ, 3{0{ ప15 s20 ualot aI (8211' 2{ 3[& G4/ @alud us121 ylsd] - ShareChat
#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - ds8? cllul aid ul5 244821- cllu & 12 uur 9 ds8l? 1 215 Y2Sl- cllu &] ६६ g्ी धूu भें %५तt २७l &ूं भे Gभ२ ९२, भे२ @२खे भें थोडी सी शIभ Glut ६े। (3215 ~iuti ; d?trtl ತ ೩2l G? ೮15 udlಯl, G२ऐ &८ भें भे२८ थोड। नIभ Glul ६े। भिढे २१२ भुऊे वो तो डोर्ध शिSAI नeीं , [ HR3 uId s dat $ ual7 clu డ1 ೭೭ 52 ೧11 ಠ[ ೬atcl 2ತ "uS[" ೬aL, 6213 slsl 4 d 1? Sl 4214 cllu &/7 cluीतभ Y5[2 u(Sd ds8? cllul aid ul5 244821- cllu & 12 uur 9 ds8l? 1 215 Y2Sl- cllu &] ६६ g्ी धूu भें %५तt २७l &ूं भे Gभ२ ९२, भे२ @२खे भें थोडी सी शIभ Glut ६े। (3215 ~iuti ; d?trtl ತ ೩2l G? ೮15 udlಯl, G२ऐ &८ भें भे२८ थोड। नIभ Glul ६े। भिढे २१२ भुऊे वो तो डोर्ध शिSAI नeीं , [ HR3 uId s dat $ ual7 clu డ1 ೭೭ 52 ೧11 ಠ[ ೬atcl 2ತ "uS[" ೬aL, 6213 slsl 4 d 1? Sl 4214 cllu &/7 cluीतभ Y5[2 u(Sd - ShareChat