जिगर_चूरूवी

Shamsher bhalu Khan
520 ने देखा
3 महीने पहले
#याद रहते हैं.... परिंदों को आशियाने याद रहते हैं दोस्तों को वो याराने याद रहते हैं। खुद में खुश्बू के ज़माने याद रहते हैं वो तेरे न आने के बहाने याद रहते हैं। सरवरक ए दफ्तर बंद किए हमने अन लिखे फसाने याद रहते हैं। मैं पारसा नहीं के सब जानता नग़्मे ताल और तराने याद रहते हैं। जिगर लोग टूट चुके बिखरे हुए कहे अल्फ़ाज़ के माने याद रहते हैं। #💑डेस्टिनेशन वेडिंग #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
495 ने देखा
4 महीने पहले
हम आहंगी चिनाबों में रहा करती थी मलिके हुस्न नकाबों में रहा करती थी। तस्वीर तेरी मेरे ख्वाबों में रहा करती थी हर्फ सी सूरत किताबों में रहा करती थी। वक्त ने सिकंदर कैस किसरा मिटा दिए गुम अंधेरों में जो नवाबों में रहा करती थी। आज हैं गर्त में हुनर और हौंसले उनके कौम जो ऊंचे बाबों में रहा करती थी। जिगर फिर गए दिन मेहनतकशां के शाद हैं वो जो अज़ाबों में रहा करती थी। #जिगर_चूरूवी #हम_आहंगी - तालमेल #चेनाबों - दरिया ए चिनाब #नकाब - घूंघट #ख़्वाब - सपना #मलिके - रानी #हर्फ़ - अक्षर #कैस_किसरा - अपने समय का विख्यात समाज #नवाब - राजा #गर्त - खाई, नीचे #बाबों - दरवाजे #मेहनतशां - मेहनती #अज़ाब - पीड़ा, दुःख,सजा #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
561 ने देखा
4 महीने पहले
कुछ बातों के ज़ाहिर न होने में भलाई है हर काम में माहिर न होने में भलाई है। जादू से हर मुश्किल का हल नामुमकिन मुद्दों के हल में साहिर न होने में भलाई है। जुनूने जीत हराने का शोक नहीं अच्छा चंद मामलों में काहिर न होने में भलाई है। देखने में देहाती ये गमछे धोती वाले सूट बूट वाले आहिर न होने में भलाई है। जिगर नहीं अच्छा जो काम का नहीं सोने के ताहिर न होने में भलाई है। #जिगर_चूरूवी #काहिर - विजेता #ज़ाहिर - सामने, #माहिर - विशेषज्ञ, #साहिर - जादूगर, #आहिर - ग्वाला #ताहिर - शुद्ध #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
420 ने देखा
4 महीने पहले
#चराग़..... एक चराग से जमाने में उजाला कीजिए शिकायत को दिल में न पाला कीजिए। कुछ दबे कुचलों को संभाला कीजिए एक ही मसला न रोज़ उछाला कीजिए। दूर किनारे से पहले खुद को देखिए यूं इल्ज़ाम लोगों पर न डाला कीजिए। मन के कोने में सही, ग़ैरत जिंदा रखिए जहां ज़रूरी आवाज़ निकाला कीजिए। रहबरी का जुनून घर फूंकने जैसा खुद उजड़ औरों को संभाला कीजिए। जिगर न तैरें वसीलों के दम पे कश्तियां वज़्न कंधों पर खुद के डाला कीजिए। #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
552 ने देखा
4 महीने पहले
बोलो...... धरती पर लहजा सुधार लो नहीं अमर नहीं अकेले इस जमीन पर तुम और मैं यह आवाज व्यवहार ऐसा अशोभनीय चिल्लाहटें फाड़ डालती हैं कान के पर्दे चीर देती हैं हो कलेजे के पार झकझोरतीं समुदाय है जो सुनता है सब वो अन कहा समाज जाने पड़ौसी यार दोस्त व्यवहार एक शौ है है जीवंत नाटक जीना अपना किरदार को निभाना है बखूबी हम सबको खलनायक नायक मसखरा की भूमिका में मैं कहता हूं खुद ही से जिगर अमर नहीं। #🙏शाम की आरती🪔 #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
425 ने देखा
4 महीने पहले
#मिलते_हैं जंजीरों की खानक से बाजुओं को बल मिलते हैं। इन तख्तों पर मौत के मुश्किलों के हल मिलते हैं। मिलना गर तुम चाहो तो दरकार ए जरूरत नागा ढूंढने से सनम क्या ख़ुदा अज़्वाज़ल मिलते हैं। मिलते हैं मुर्दे जन्नत में अहले खाना से बेखुद बताते यहां जो किया वहां के फ़ल मिलते हैं। माहिरिन ने बनाया ताज़ कटवा कर हाथ अपने शाहजहां और मुमताज़ वहां बेकल मिलते हैं। जिगर आफताब को थाम लिया आसमान ने गोद में ज़मीन की सागर के जल मिलते हैं। #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
530 ने देखा
4 महीने पहले
#दोस्तों के नाम एक ग़ज़ल - गुजरे ना एक पल हाल बेहाल है तेरे बगैर जीना क्या मरना मुहाल है। यारी के आसमान के हम चांद तारे बारे में अपने औरों के अजब ख्याल है। दुनिया की मर्दुमशुमारी में फकत हम दो करे कोई बराबरी क्या मजाल है। बुरा वक्त आया गया आगे का नहीं पता निभाई, निभाएंगे तलक विसाल है। जिगर यारबास की जान दोस्त उसके बिन यार के दिन लगता एक साल है। #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
331 ने देखा
4 महीने पहले
#एक_नसीहत... मुखालिफ हालात समझदारी से काम लो अपना या पराया गिरते को थाम लो। किए सौदे के अदा पूरे दाम करो बेची वो शे के पूरे-पूरे दाम लो। बदले में गवाही के ना कुछ लेना तुम अमीन रह कर खुदा का नाम लो। काम वो करो कि कोई कहे वाह खूब रस लो मीठा, गुठली से आम लो। थोड़ी सी जिंदगी सर पे न इल्ज़ाम लो जिगर झुके सर, मौत का जाम लो। #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
2K ने देखा
4 महीने पहले
#रात_की_बात........ मुझ पे बीती कल रात की बात उजड़ी साँसों, जज़्बात की बात। आ रहा शहर से गाँव एक रात की बात हुई अपनी मौत से मुलाक़ात की बात। सड़क पे नचा रहे गाड़ियां नौजवां दिल काँप उठा देख हालात की बात। पूछा कि बताओ आपनी शिनाख़्त भड़के बड़े, करने लगे सवालात की बात। बोले, किसने तुम्हें डांटने का हक़ दिया नापो ज़मीन या सुनोगे लात की बात। कुछ डरा कुछ डराया बताया वालिदैन को, किराये ले जाते थार में बरात की बात। पहले भी यहाँ हादसे कितने गुजरें, कह न सका बाप कौन जात की बात। इतने में ट्रक थार स्कॉर्पियो टकराए औलाद हुई चिथड़े सौगात की बात। जिगर समझ ले ज़िंदगी खेल नहीं है छोड़ पुरानी कर नई रिवायात की बात। #जिगर_चूरूवी
Shamsher bhalu Khan
483 ने देखा
4 महीने पहले
#इवेंट_मैनेजमेंट - धर्म स्थल पूज्य के नाम पे राजनीति शो। धर्म उत्सव, आस्था का पर्व पारम्परिक। लेकिन क्यों धर्म मंच पे नहीं धर्माधिकारी। यहां पे सिर्फ दो महान लोग हैं वो नेतागण। क्यों हुआ है धार्मिक आयोजन राजनैतिक। मंच पे धर्म प्रतिनिधि नहीं नेता मौजूद। ये कार्यक्रम प्रेरित प्रायोजित ग्रेट इवेंट। नींव की शिला रखते हैं नेताजी उद्घाटन भी। झंडा चढ़ाएं वही महानुभव हैं उद्दीपक। धर्माचार्य इतनी दूर क्यों आस्था के नाम। उपास्य थे हैं और रहेंगे भी कौन ले आया। क्या ला सके खुदा राम देवता अंगुली पर। पूरी कोशिश जन स्मृति में ये बो दिया जाए मैंने बनाया हूं मैं ले कर आया मेरे साथ में। राजनीतिक नशे का उत्पाद जहरीला है। मंच पे बैठे सफेद चेहरे के काले मनके ये गलत है दांव रणनीतिक उलटे पड़े। धर्म का धंधा मजहब की रोटी जहरीली है। क्या ये ठीक मूर्खता नहीं है आम जन से। जनता जाने विश्वास नहीं है सत्ता का खेल। चुनावी स्टंट प्रॉप की तरह का उपयोग। समृद्धि क्या खुद को केंद्र में रखना होगा। रोटी कपड़ा व मकान को भूले दुःखी जनता। ईश्वर जाने समझ मानव की संकुचित है। प्यासे खून के राजनीति इवेंट क्या लाभ दे। बहुत हुआ सीमा से बाहर है अब सहना। अलग करो धर्म मजहब चुनावों से। अल्लाह, राम शस्त्र नहीं आस्था खिलवाड़ नहीं। आरती अजां एक हो जाएं तो झगड़ा खत्म। जिसको जहां जाना हो सहर्ष चला जाएगा। जिगर सुनो इस नशे को बंद करना होगा। #जिगर_चूरूवी