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##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
#भगवद गीता🙏🕉️ - वेदाहं समतीतानि   वर्तमानानि चार्जुन। भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन I। हे अर्जुन ! पूर्वमें व्यतीत हुए और वर्तमानमें स्थित तथा आगे होनेवाले सब भूतोंको मैँ जानता परन्तु ೯ कोई भी श्रद्धा- भक्तिरहित पुरुप नहीं जानता II २६ Il னT द्वन्द्वमोहेन इच्छाद्वेपसमुत्थेन भारत| सर्वभूतानि सम्मोहं सर्गे   यान्ति परन्तप ।। हे भरतवंशी अर्जुन! संसारमें इच्छा और द्वेपसे सुख-दुःखादि द्वन्द्वरूप मोहसे सम्पूर्ण प्राणी ওেল अत्यन्त अज्ञताको प्राप्त हो रहे हैँ II २७ Il येपां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम्। ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ।। परन्तु निष्कामभावसे श्रेष्ठ कर्मोंका आचरण करनेवाले ಸ पाप नष्ट हो गया है, 4 M- पुरुपोंका द्वेपजनित द्वन्द्वरूप मोहसे मुक्त दृढ़निश्चयी भक्त सब प्रकारसे भजते हैेँ Il २८ II मुझको श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 W; गोरखपुर से साभार যীলা वेदाहं समतीतानि   वर्तमानानि चार्जुन। भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन I। हे अर्जुन ! पूर्वमें व्यतीत हुए और वर्तमानमें स्थित तथा आगे होनेवाले सब भूतोंको मैँ जानता परन्तु ೯ कोई भी श्रद्धा- भक्तिरहित पुरुप नहीं जानता II २६ Il னT द्वन्द्वमोहेन इच्छाद्वेपसमुत्थेन भारत| सर्वभूतानि सम्मोहं सर्गे   यान्ति परन्तप ।। हे भरतवंशी अर्जुन! संसारमें इच्छा और द्वेपसे सुख-दुःखादि द्वन्द्वरूप मोहसे सम्पूर्ण प्राणी ওেল अत्यन्त अज्ञताको प्राप्त हो रहे हैँ II २७ Il येपां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम्। ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ।। परन्तु निष्कामभावसे श्रेष्ठ कर्मोंका आचरण करनेवाले ಸ पाप नष्ट हो गया है, 4 M- पुरुपोंका द्वेपजनित द्वन्द्वरूप मोहसे मुक्त दृढ़निश्चयी भक्त सब प्रकारसे भजते हैेँ Il २८ II मुझको श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 W; गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat