sn vyas
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#कर्म #धर्म कर्म #शिव पार्वती
कर्मों का हिसाब ⚖️ भगवान शिव और माता पार्वती की एक अद्भुत कथा
हम अक्सर छुपकर गलत काम करते हैं और सोचते हैं कि "किसी ने देखा नहीं!" लेकिन हम भूल जाते हैं कि हमारे भीतर बैठी आत्मा रूपी परमात्मा हर कर्म का साक्षी है। मनुष्य द्वारा किए गए हर कर्म का फल उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है।
आइए, इस रहस्य को शिव-पार्वती की एक कथा से समझते हैं:
🚶♂️ मृत्यु लोक का भ्रमण:
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती मृत्यु लोक (धरती) के भ्रमण पर निकले। अचानक माता पार्वती एक दृश्य देखकर ठिठक गईं। उन्होंने देखा कि एक कसाई निर्दयता से एक साथ कई पक्षियों की हत्या कर रहा था।
❓ माता पार्वती का प्रश्न:
यह देखकर माता व्यथित हो गईं और शिव जी से पूछा— "हे प्रभु! आप कहते हैं कि कर्मों का फल इसी धरती पर भोगना पड़ता है। अब यह बताएं कि यह कसाई कितने जन्म पक्षी के रूप में लेगा और कितनी बार ये पक्षी मनुष्य जन्म लेंगे? यह हिसाब कैसे बराबर होगा?"
प्रभु मुस्कुराए और पार्वती जी से बोले, "आओ, आगे चलें।"
👁️ कर्मों का चक्र (प्रभु का उत्तर):
कुछ दूर जाने के बाद प्रभु रुके और माता पार्वती को इशारे से एक और दृश्य दिखाया।
वहां एक बड़ा सा जानवर चारा खा रहा था, जिसके शरीर पर एक गहरा जख्म था। बहुत से मांसाहारी पक्षी आते, उस जख्म से मांस नोचते और उड़ जाते। वह जानवर दर्द से तड़प रहा था, लेकिन बेबस था। कुछ ही देर में वहां अन्य मांसाहारी जानवर भी आ गए और उसे नोच-नोच कर खाने लगे। तड़प-तड़प कर उस बेबस जानवर ने प्राण त्याग दिए।
शिव जी ने कहा— "सुनो पार्वती! यह तड़पने वाला जानवर पिछले जन्म में वही कसाई था और ये पक्षी व जानवर वो जीव थे, जिनका उसने वध किया था। इन सबने मिलकर एक ही बार में अपना हिसाब बराबर कर लिया। यह जन्म-जन्मांतर का चक्र है, जो तब तक चलता है जब तक सबका हिसाब-किताब बराबर न हो जाए।"
💡 कहानी की सीख:
कोई भी कर्म करने से पहले विचार अवश्य करें! प्रकृति का न्याय बहुत सटीक होता है और यहाँ हर कर्म का हिसाब चुकाना पड़ता है।
"इसलिए भूलकर भी कभी बेजुबान जीवों को कष्ट न दें, मांसाहार से बचें और यदि आप खाते हैं, तो आज ही इसे छोड़ने का संकल्प लें।"
🙏जय श्रीराम 🙏
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