sn vyas
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#महाभारत #महाभारत की कथा " महाभारत युद्ध के बाद" विधवाओं का क्या हुआ ? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ जानिए शास्त्रसम्मत सत्य ​करोड़ों योद्धाओं का अंत, कुरुक्षेत्र की भूमि लहू से लाल और पीछे छूट गईं हस्तिनापुर की अनगिनत विधवाएं! क्या आप जानते हैं कि महाभारत के उस भीषण नरसंहार के बाद, उन अभागिन स्त्रियों का क्या हुआ जिनके पति युद्ध में मारे गए थे? क्या वे उम्र भर विलाप करती रहीं, या शास्त्र किसी और भयानक सत्य की ओर इशारा करते हैं? ​ शास्त्रसम्मत प्रमाण (ग्रंथ एवं अध्याय) इस हृदयविदारक और अलौकिक घटना का पूर्ण विवरण स्वयं महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत के 'आश्रमवासिक पर्व' में विस्तार से मिलता है। ​ग्रंथ का नाम: महाभारत पर्व: आश्रमवासिक पर्व अध्याय: 32 और 33 ​(विशेष रूप से अध्याय 33, जहाँ विधवाओं की मुक्ति का अंतिम विधान वर्णित है) - ​सम्पूर्ण कथा👉 जब अठारह दिनों का युद्ध समाप्त हुआ तब कौरवों और पांडवों की ओर से असंख्य योद्धा मारे जा चुके थे। हस्तिनापुर की गलियाँ वीरों से नहीं, बल्कि उनके बिछोह में रोती हुई स्त्रियों से भर गईं। गांधारी ने अपने सौ पुत्र खो दिए। द्रौपदी ने अपने पाँच पुत्र खो दिए। उत्तरा विधवा हो गई क्योंकि अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। महाभारत में वर्णन मिलता है कि कुरु स्त्रियाँ अपने पतियों, पुत्रों और भाइयों को याद कर विलाप करती हुई रणभूमि में भटक रही थीं। यह दृश्य इतना करुण था कि, स्वयं महर्षि व्यास भी उन विधवाओं को समझाने में नाकाम हो रहे थे। फिर एक दिन व्यास जी ने रची एक रचना, जिसकी किसने कल्पना तक नहीं की। गंगा के तट पर महामुक्ति का वो विधान👉 ​युद्ध के 15 वर्ष बाद, महर्षि वेद व्यास की कृपा से गंगा तट पर एक ऐसी घटना घटी जिसकी कल्पना भी असंभव थी। वेद व्यास ने अपनी दिव्य शक्तियों से युद्ध में मारे गए सभी वीरों (कर्ण, दुर्योधन, अभिमन्यु आदि) को एक रात के लिए जीवित कर दिया। वह रात अद्भुत थी, जहाँ विधवाएं अपने पतियों से पुनः मिलीं। लेकिन सस्पेंस तो सुबह की पहली किरण के साथ शुरू होना था। वेद व्यास की कठिन शर्त👉 जैसे ही सुबह होने वाली थी, जीवित हुए वीर वापस गंगा जल में जाने लगे तब उनकी पत्नियां (विधवाएं) विलाप करने लगीं और अपने पतियों को वापस जाने से रोकने लगी। तब महर्षि वेद व्यास ने एक अंतिम, भयावह और मुक्तिदायी शर्त रखी। ​गंगा में महाप्रयाण👉 व्यास जी ने कहा, "जो भी स्त्री अपने पति के लोक में शाश्वत निवास चाहती है, वह अभी इस पवित्र गंगा जल में प्रवेश करे।" व्यास जी के इन शब्दों को सुनकर, बिना एक क्षण गवाएं, सैकड़ों विधवाओं ने गंगा के शीतल और गहरे जल में छलांग लगा दी। व्यास जी के तपोबल से वे डूबी नहीं, बल्कि उन्होंने अपना शरीर त्यागकर दिव्य रूप धारण किया और सीधे अपने पतियों के पास पतिलोक (स्वर्ग) चली गईं। इस प्रकार, शास्त्रसम्मत विधि से उन्हें विरह से मुक्ति मिली। निष्कर्ष👉 ​यह कथा सिद्ध करती है कि सनातन धर्म में सतित्व, तप और गुरु (वेद व्यास) की शक्ति काल के नियमों को भी बदल सकती है। वेद व्यास ने उन विधवाओं को उम्र भर विलाप करने के लिए नहीं छोड़ा, बल्कि योग बल से उन्हें दिव्य मुक्ति प्रदान की। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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