कविता

Mahendra Narayan
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19 घंटे पहले
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आसमां चाहिए न ज़मीं चाहिए ज़िन्दगी को 'महज़' ज़िन्दगी चाहिए आज के दौर में है हकीकत यही आदमी को "महज़" आदमी चाहिए #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #कविता #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📚कविता-कहानी संग्रह
Mahendra Narayan
562 ने देखा
4 दिन पहले
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मौका जिस को भी मिले,वही दिखाए रंग । जैसा जिसका मन रहे , वैसा उसका ढंग ॥ वैसा उसका ढंग, चाल #📚कविता-कहानी संग्रह #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 भी चलता वैसा । कहॉं रहेगा हंस, बनेगा बगुला जैसा ॥ ताकत जिसके हाथ ,मारता छक्का चौका I कोई आपद साथ ,ढूँढ़ता अपना मौका ॥
कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ")
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29 दिन पहले
एक कविता मजदूर दिवस पर मेहनत में कोई कसर नहीं होती, खुशियाँ कभी मयस्सर नहीं होती, ढो रहा हूं अपनी ज़िंदगी का बोझ तकलीफ की मेरी ख़बर नहीं होती! फटती एड़ियां पड़ते छाले हाथों में, किसी को हमारी फ़िकर नहीं होती! रोज़ाना ही रहता है दर्द मेरे बदन में, शिक़ायत पर ये अक्सर नहीं होती! #sumitkikalamse ✍सुमित मानधना 'गौरव', सूरत 😎 #📚कविता-कहानी संग्रह #1, मई मजदूर दिवस 🙏 #🙏1,मई मजदूर दिवस 👍s #kavita #कविता