एक कविता मजदूर दिवस पर
मेहनत में कोई कसर नहीं होती,
खुशियाँ कभी मयस्सर नहीं होती,
ढो रहा हूं अपनी ज़िंदगी का बोझ
तकलीफ की मेरी ख़बर नहीं होती!
फटती एड़ियां पड़ते छाले हाथों में,
किसी को हमारी फ़िकर नहीं होती!
रोज़ाना ही रहता है दर्द मेरे बदन में,
शिक़ायत पर ये अक्सर नहीं होती!
#sumitkikalamse
✍सुमित मानधना 'गौरव', सूरत 😎
#📚कविता-कहानी संग्रह #1, मई मजदूर दिवस 🙏 #🙏1,मई मजदूर दिवस 👍s #kavita #कविता