रामचरितमानस

sn vyas
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7 days ago
#रामचरितमानस #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे। 1. रक्षा के लिए मामभिरक्षक रघुकुल नायक | घृत वर चाप रुचिर कर सायक || 2. विपत्ति दूर करने के लिए राजिव नयन धरे धनु सायक | भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक || 3. सहायता के लिए मोरे हित हरि सम नहि कोऊ | एहि अवसर सहाय सोई होऊ || 4. सब काम बनाने के लिए वंदौ बाल रुप सोई रामू | सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू || 5. वश मे करने के लिए सुमिर पवन सुत पावन नामू | अपने वश कर राखे राम || 6. संकट से बचने के लिए दीन दयालु विरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी || 7. विघ्न विनाश के लिए सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही | राम सुकृपा बिलोकहि जेहि || 8. रोग विनाश के लिए राम कृपा नाशहि सव रोगा | जो यहि भाँति बनहि संयोगा || 9. ज्वार ताप दूर करने के लिए दैहिक दैविक भोतिक तापा | राम राज्य नहि काहुहि व्यापा || 10. दुःख नाश के लिए राम भक्ति मणि उस बस जाके | दुःख लवलेस न सपनेहु ताके || 11. खोई चीज पाने के लिए गई बहोरि गरीब नेवाजू | सरल सबल साहिब रघुराजू || 12. अनुराग बढाने के लिए सीता राम चरण रत मोरे | अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे || 13. घर मे सुख लाने के लिए जै सकाम नर सुनहि जे गावहि | सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं || 14. सुधार करने के लिए मोहि सुधारहि सोई सब भाँती | जासु कृपा नहि कृपा अघाती || 15. विद्या पाने के लिए गुरू गृह पढन गए रघुराई | अल्प काल विधा सब आई || 16. सरस्वती निवास के लिए जेहि पर कृपा करहि जन जानी | कवि उर अजिर नचावहि बानी || 17. निर्मल बुद्धि के लिए ताके युग पदं कमल मनाऊँ | जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ || 18. मोह नाश के लिए होय विवेक मोह भ्रम भागा | तब रघुनाथ चरण अनुरागा || 19. प्रेम बढाने के लिए सब नर करहिं परस्पर प्रीती | चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती || 20. प्रीति बढाने के लिए बैर न कर काह सन कोई | जासन बैर प्रीति कर सोई || 21. सुख प्रप्ति के लिए अनुजन संयुत भोजन करही | देखि सकल जननी सुख भरहीं || 22. भाई का प्रेम पाने के लिए सेवाहि सानुकूल सब भाई | राम चरण रति अति अधिकाई || 23. बैर दूर करने के लिए बैर न कर काहू सन कोई | राम प्रताप विषमता खोई || 24. मेल कराने के लिए गरल सुधा रिपु करही मिलाई | गोपद सिंधु अनल सितलाई|| 25. शत्रु नाश के लिए जाके सुमिरन ते रिपु नासा | नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा || 26. रोजगार पाने के लिए विश्व भरण पोषण करि जोई | ताकर नाम भरत अस होई || 27. इच्छा पूरी करने के लिए राम सदा सेवक रूचि राखी | वेद पुराण साधु सुर साखी || 28. पाप विनाश के लिए पापी जाकर नाम सुमिरहीं | अति अपार भव भवसागर तरहीं || 29. अल्प मृत्यु न होने के लिए अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा | सब सुन्दर सब निरूज शरीरा || 30. दरिद्रता दूर के लिए नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना | नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना || 31. प्रभु दर्शन पाने के लिए अतिशय प्रीति देख रघुवीरा | प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा || 32. शोक दूर करने के लिए नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी | आए जन्म फल होहिं विशोकी || 33. क्षमा माँगने के लिए अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता | क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता || ।। राम राम ।।
sn vyas
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2 months ago
🚩 अद्भुत रामायण ज्ञान: काकभुशुण्डि की अमर कथा 🚩 आखिर कौन थे काकभुशुण्डि? क्यों एक कौए को माना जाता है परमज्ञानी राम भक्त? क्यों उन्हें लेना पड़ा 1000 बार जन्म और कैसे उन्होंने मिटाया गरुड़ जी का संदेह? गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के उत्तर काण्ड में इस दिव्य चरित्र का अद्भुत वर्णन किया है। आइए जानते हैं उनके रहस्यमयी जीवन की पूरी कहानी। 👇 🦅 गरुड़ का संदेह और काकभुशुण्डि से भेंट लंका युद्ध के दौरान जब मेघनाद ने भगवान राम को 'नागपाश' में बांध दिया, तब देवर्षि नारद के कहने पर गरुड़ जी ने आकर उन्हें मुक्त किया। लेकिन, स्वयं भगवान को बंधनों में देख गरुड़ को उनके 'परमब्रह्म' होने पर संदेह हो गया। इस संदेह को मिटाने के लिए नारद जी ने उन्हें ब्रह्मा जी के पास, ब्रह्मा जी ने शिव जी के पास और अंत में भगवान शिव ने उन्हें परमज्ञानी काकभुशुण्डि के पास भेजा। काकभुशुण्डि जी ने गरुड़ को पवित्र राम कथा सुनाई और उनका संदेह दूर किया। 📜 काकभुशुण्डि के पूर्व जन्म और श्राप की कहानी काकभुशुण्डि की कहानी अहंकार से भक्ति तक की यात्रा है। 🔹 पहला जन्म और शिव का श्राप: अपने प्रथम जन्म में वे अयोध्या में एक शिव भक्त थे, लेकिन अहंकारवश अन्य देवताओं की निंदा करते थे। बाद में उज्जैन में एक दयालु गुरु की शरण में गए। लेकिन वहां भी उनका अहंकार बढ़ा और उन्होंने भगवान विष्णु से द्रोह किया। एक दिन शिव मंदिर में अपने गुरु का अपमान करने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया: "तू सर्प योनि में जा और इसके बाद तुझे 1000 बार अलग-अलग योनियों में जन्म लेना पड़ेगा।" 🔹 गुरु की कृपा और वरदान: गुरु ने दयालु होकर शिव जी से क्षमा मांगी। शिव जी ने श्राप तो वापस नहीं लिया, लेकिन वरदान दिया: "इसे 1000 जन्म लेने पड़ेंगे, लेकिन जन्म-मृत्यु का कष्ट नहीं होगा, ज्ञान नष्ट नहीं होगा और इसे पूर्व जन्मों की स्मृति बनी रहेगी। अंत में इसे श्रीराम की भक्ति प्राप्त होगी।" 🐦 कैसे बने 'कौआ' (काकभुशुण्डि)? हजारों जन्मों के बाद, अंतिम जन्म में वे ब्राह्मण बने और ज्ञान प्राप्ति के लिए लोमस ऋषि के पास गए। वहां ऋषि से तर्क-वितर्क और हठ करने पर क्रोधित होकर लोमस ऋषि ने श्राप दिया: "जा तू चंडाल पक्षी (कौआ) हो जा।" वे तुरंत कौआ बन गए। बाद में ऋषि को पछतावा हुआ, उन्होंने उसे वापस बुलाकर 'राम मंत्र' दिया और 'इच्छामृत्यु' का वरदान दिया। कौए के शरीर में ही राम मंत्र मिलने के कारण उन्हें इस रूप से प्रेम हो गया और वे 'काकभुशुण्डि' कहलाए। 🕉️ प्रभु राम का साक्षात्कार और अमरता कौए के रूप में एक बार उनकी भेंट बाल रूप भगवान राम से हुई। जब प्रभु खेल रहे थे, तो काकभुशुण्डि ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। तभी उन्हें भगवान के मुख के भीतर पूरे ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के दर्शन हुए। वे समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं परमेश्वर हैं। उन्होंने क्षमा मांगी। भगवान राम ने प्रसन्न होकर उन्हें भक्ति का वरदान दिया और अमर कर दिया। राम जी ने आशीर्वाद दिया कि काल (समय) काकभुशुण्डि को नहीं मार सकता और वे कल्प के अंत तक जीवित रहेंगे। ✨ अद्भुत तथ्य: 👁️‍🗨️ वेदों और पुराणों के अनुसार, काकभुशुण्डि जी ने 11 बार रामायण और 16 बार महाभारत का युद्ध देखा है। ⏳ वे आज भी अमर हैं। जब भी भगवान राम का अवतार होता है, वे अयोध्या जाकर उनकी बाल लीलाओं का दर्शन करते हैं। जय श्री राम! 🙏 #रामचरितमानस #रामायण #जय श्री राम
Naman News
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2 months ago
#📹 ट्रेंडिंग वीडियो #रामचरितमानस #श्री रामचरितमानस 🕉️ #📰 बिहार अपडेट “होई है वही जो राम रची राखा…” भगवद्गीता के श्लोक गाकर वायरल हो रहीं शालिनी राजपूत!