जय गीता भागवत

sn vyas
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6 days ago
🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_३१/२ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 ज्ञानाग्नि कैसे प्रकट होती है ? 🦚 गतांक से आगे गोस्वामी जी इस बात को रामायण में लिखते हैं कि--- *ईश्वर अंस जीव अविनासी।* *चेतन अमल सहज सुखरासी॥* *सो मायाबस भयउ गोसाई।* *बंध्यो कीर मरकट की नाई ॥* *अरे ! तू शेर का बच्चा है । तू भेड़ नहीं है । तू सत्- चित- आनंद स्वरूप है । यह देह तेरा स्वरूप नहीं है । जब कोई समर्थ गुरु यह ज्ञान देगे, तब ही जीव का बेड़ा पार होगा। स्वरूप का ज्ञान होते ही संचित कर्म तत्काल भस्म हो जाते हैं। यह बात हम सब के अनुभवों में से भी सिद्ध होती है।* *एक संत का भाव है---* *ईश्वर का अंश जीव तो शुद्ध स्वरूप है , जिसको भूलकर यह अपने को किसी का पुत्र,, किसी का पिता ,, किसी की प्रजा ,, किसी का राजा ,, किसी कुल का ,, किसी वर्ण का ,, किसी आश्रम का ,,, मान रहा था ।उस भ्रम की निवृत्ति इतने साधनों के बाद हो जाने पर जीव यह निश्चित करता है,, कि मैं तो शुद्ध स्वरूप ,, ईश्वर का अंश ,, चेतन अमल हूं ।* *यह माया कृत संसारी नाते झूठे थे , और उसने अपने को ईश्वर का अंश मान लिया , तब वह संसार संबंध को मिथ्या मांग कर उससे अलग हो जाता है ,, यही ग्रन्थि का निरुआना या छोड़ना है । जब निश्चित रूप से संसारी नाते छूट जाते हैं , और केवल प्रभु की ही प्रसन्नता जीव स्वीकार कर लेता है ,, तब वह कृतार्थ हो जाता है।* अस्तु: (लेकिन भैया यह बड़ा मुश्किल है) *एक व्यक्ति रात को बारह बजे तक अपनी पत्नी से बात कर रहा था और इसके बाद उसकी आंखें बंद हो गई, (उसे नींद आ गई ) । निद्रा में वह एक स्वप्न देखने लगा । सपने में उसने एक व्यक्ति की हत्या कर दी ।उस पर तीन साल का मुकदमा चला । (रात को बारह और साढे बारह के बीच ) फिर इस व्यक्ति को दस साल की कैद की सजा हो गई और उसे कैद में डाल दिया गया ।* *(वास्तव में वह अपने बिस्तर पर पड़ा सो रहा था ) जेलर उसे पीठ पर चाबुक मारता था। इससे उसकी पीठ प्रतिदिन खून से लथपथ हो जाती थी। इस तरह उसने तीन साल की सजा तो भोग ली।* *(रात को बारह और साढे बारह के बीच)* *>>>>> एक दिन जेलर ने गुस्से में उसकी पीठ पर जोर से चाबुक मारा और वह व्यक्ति "बाप रे बाप " करके चिल्ला उठा और निंद्रा से जाग गया। उसकी पत्नी ने घबराकर उससे पूछा कि क्या हुआ ? तो उसने बताया कि " मेरी पीठ देखो ,, खून से कैसी लथपथ हो गई है "।* *उसकी पत्नी ने कहा-- आप तो बिस्तर पर सो रहे हैं और आपकी पीठ भी बिल्कुल चिकनी और कोमल है ,, आपकी पीठ पर कुछ भी नहीं हुआ है ।* *तब वह व्यक्ति सपना अवस्था से जागृत अवस्था में आया और उसे अपने सच्चे स्वरूप का ज्ञान हुआ, कि वह हत्यारा नहीं है ,, बल्कि वास्तव में वह निर्दोष है । फिर उसने अपनी पत्नी को सपने की बात बताई और कैसे उसके विरूद्ध तीन साल तक हत्या का मुकदमा चला । और उसे दस साल की सख्त कैद की सजा हुई । उसमें से उसने तीन साल की सजा भोग ली।* *तब उसकी पत्नी ने कहा कि "रात को बारह बजे तक तो हम दोनों बातें कर रहे थे , और इस समय घड़ी में साढे बारह बजे हैं ,, इस आधे घंटे में आप छह साल के लिए कहां जा और आए ? ।* *उसे दस साल की सजा हुई थी , उसमें से तीन साल की सजा भोग चुका था ,, अब बाकी सात साल की सजा कौन भोगेगा । सपना अवस्था से जागृत अवस्था में आते ही उसकी सात साल की जेल की सजा का संचित कर्म भस्म सात् हो गया । क्योंकि उसे अपने सच्चे स्वरूप का ज्ञान हो गया था ।* *ज्ञानाग्नि सर्व कर्माणि भस्मसात् कुरुतेऽर्जुन।* *जैसे सपना अवस्था के सुख दुख सपना अवस्था में सत्य आभासित होते हैं , किंतु जागृत अवस्था में मिथ्या हो जाते हैं, वैसे ही जागृत अवस्था में सुख-दुख आदि जागृत अवस्था में सत्य है , किंतु ज्ञान अवस्था में मिथ्या हो जाते हैं।* ( इस पर ध्यान दीजिए प्रभु जी) क्रमश इसके बाद अब कल आगे पढ़ेंगे ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
sn vyas
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7 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_३१/१ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 ज्ञानाग्नि कैसे प्रकट होती है ? 🦚* जीव अपने असली स्वरूप को भूल गया है , जीव ब्रह्म का ही अंश है । ब्रह्म- सत , चित्त, आनंद स्वरूप है , इसलिए जीव भी सत , चित्त , आनंद स्वरूप ही है । किंतु जीव को इसका ज्ञान नहीं है , इसलिए जन्म-मृत्यु के चक्र में भटकता रहता है। *भगवान गीता में कहते हैं कि--* *ममैवांशो जीवलोके जीवभूत: सनातन:।* *जीव ब्रह्म का अंश होने के बावजूद, मुक्त होने के बावजूद, माया के वशीभूत होकर बद्ध हो गया है , अर्थात बंधनों में पड़ गया है।* *जीव को अपने स्वरूप का यथार्थ ज्ञान हो जाए, इसी का नाम "ज्ञान" है । ज्ञान होते ही उसके सभी संचित कर्म जलकर भस्म हो जाते हैं। जीव को स्वरूप का ज्ञान होना बहुत कठिन है । कोई बहुत ही समर्थ गुरु मिले , तो ही यह ज्ञान प्राप्त होता है।* *एक शेर का बच्चा जन्म लेते ही उसकी मां से अलग हो गया, और भेड़ों के मालिक ने इस नवजात शिशु को भेड़ों के साथ पाल - पोस कर बड़ा किया । यह शेर का बच्चा हमेशा भेड़ों के झुंड में ही रहता था , घूमता फिरता था, और अज्ञानता बस स्वयं को भी भेड़ ही समझता था।* *"मैं भी भेड़ ही हूं " ऐसी उसकी दृढ मान्यता हो गई थी। एक बार एक शेर घूमता -फिरता भेड़ों के झुंड के पास आया , जिसमें यह शेर का बच्चा भी था । शेर को देखकर भेड़ों का झुंड भाग खड़ा हुआ। साथ में वह शेर का बच्चा भी भाग खड़ा हुआ । यह देखकर उस शेर को आश्चर्य हुआ कि भेडो के साथ यह शेर का बच्चा क्यों भयभीत होकर भाग रहा है । शेर ने उन भेड़ों को जाने दिया और शेर के बच्चे को ही पकड़ा , तो वह बच्चा ,,, शेर के हाथ जोड़ने लगा कि " मुझे छोड़ दीजिए, मुझे मारना नहीं "।* *तब शेर ने उससे कहा : अरे भाई ,, तू भेड़ नहीं है । तू तो मेरी ही जाति का शेर है । तुझे मुझसे नहीं डरना चाहिए, मैं तुझे मार कर नहीं खाऊंगा।* *लेकिन ,,, शेर के बच्चे को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ ,, वह तो यही कहता रहा कि "मैं भेड ही हूं और मुझे मारना नहीं"।* 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 *(वह तो यही कहता रहा कि "मैं भेड ही हूं मुझे मारना नहीं"।)* *फिर वह शेर उसे एक तालाब के किनारे ले गया और कहा कि इस तालाब के पानी में अपना मुख देखो , तेरा और मेरा मुख समान ही है या नहीं ? मैं गर्जना करूंगा, वैसे ही तू भी गर्जना करना ।* *उस शेर के बच्चे ने उस शेर की तरह ही गर्जना की । तो उसे अपने स्वरूप का ज्ञान हुआ और उसी समय वह भयमुक्त होकर शेर के साथ चला गया। मानव जीवन की भी ठीक ऐसी ही स्थिति है।* *जैसे सूर्य से किरण अलग होकर पूरे जगत में फैल जाती है, वैसे ही जीव भी अनादि काल से ब्रह्म से अलग हो गया है । बादल का पानी बिल्कुल साफ होता है ,, बादलों में क्षोभ होने से बूंद अलग होकर पृथ्वी पर गिरती है । आकाश से पृथ्वी पर आने तक उसमें (बीच में) ऑक्सीजन - नाइट्रोजन आदि तत्त्व मिल जाते हैं । पृथ्वी को छूते ही यह बूदे मिट्टी में मिलकर मलीन हो जाती है।* *फिर दोबारा सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से बाष्पी भवन होता है । तो उसकी उर्ध्व गति होती है और बादल के रूप में वह जल पुनः अपने असली स्थान पर पहुंचकर शुद्ध और पवित्र हो जाता है । इसी तरह जीव ब्रह्म से अलग हो गया है, वह जगत की माया के संपर्क में आकर अविद्या वस मलीन हो गया है ।* *गोस्वामी तुलसीदास जी रामायण में यह बात एक ही पंक्ति में समझाते हैं* *भूमि परत भा डाबर पानी।* *जिमि जीवहि माया लपटानी ॥* *पृथ्वी पर पडते ही पानी गदला हो गया , जैसे शुद्ध जीव को माया लिपट गई हो।* *शेर की तरह ही शेर के बच्चे रूपी जीव को यह समर्थ गुरु मिलता है, तब ही उसे सच्चे स्वरूप का ज्ञान होता है और वह कर्मों के भय से मुक्त हो जाता है।* *गोस्वामी जी इस बात को रामायण में लिखते हैं कि--* क्रमश: इसके बाद अब कल आगे पढेगे ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
sn vyas
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15 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२८/१ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 भगवान प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते है ? 🦚 *ऊपर दिखाए गए ,,, इस तरह क्रियमाण कर्म को कंट्रोल करने में निष्काम कर्म योग मदद करता है ,, और प्रारब्ध कर्म को कंट्रोल करने में भक्ति योग मदद करता है ,,, भगवान की भक्ति करने से प्रारब्ध भोगने में अच्छी राहत रहती है,, यह हकीकत है । शास्त्र और संत उसकी साक्षी देते हैं। किंतु भगवान की भक्ति कैसे की जाए ? उसको स्पष्टता से समझ लेना चाहिए।* *हम भगवान की आज्ञा के अनुसार चले नहीं और भगवान की भक्ति यानी केवल उनका नाम स्मरण करना , गुनानुवाद करना , चंदन आदि लगाना, मंदिर में दर्शन करने जाना, आदि इतना ही समझ ले तो यह भक्ति है ही नहीं ,,,,केवल सारी रात मजीरा पीटते रहने से भगत नहीं हो सकते,,, भगवान ने भक्त के लक्षण भगवत गीता के बारहवे में अध्याय में अंतिम श्लोक में बताएं हैं।* *उसमें भगवान ने यह नहीं कहा कि जो चार फुट की चोटी रखेगा या तो डेढ फुट की दाढ़ी रखेगा ,,, लूंगी या यज्ञोपवीत पहनेगा,,, वही मेरा भक्त माना जाएगा ,,, भक्त के लक्षण भगवान ने स्वमुख से गीता में निम्नलिखित बताए हैं।* *अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्र: करुण एव च।* *निर्ममो निरहंकार: सम दुख:सुख: क्षमी ॥* *संतुष्ट सततं योगी यतात्मा दृढ निश्चय:।* *मयि अर्पित- मनो बुद्धिर्यो मद् भक्त स मे प्रिय ॥* *आदि ,,,भक्तों के लक्षण भगवान में बताएं हैं और ऐसे लक्षण वाला मनुष्य मेरा भक्त कहलायेगा ,,, और वह मुझे प्रिय होगा ।* *इसमें से एक भी लक्षण अपने में न हो तो ,,,, हम अपने स्वयं को भक्त की श्रेणी में दिखा सकते नहीं ,,, और भगवान को प्रिय हो ही नहीं सकते।* क्रमशः शेष भाग कल ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
sn vyas
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16 days ago
#कर्म #कर्म ही पूजा है 🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२७/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 नाम - स्मरण-- राम नाम का जप प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करता है ?🦚 *अखा भगत सच कहता है कि---* *तिलक करता त्रेपन भया, जप माला नाका गया।* *कथा सुनी सुनी फुटिया कान, तोय न आव्यु ब्रह्म ज्ञान॥* *(अर्थात --- तिलक करते-करते 53 साल बीत गए। जपमाला के छेद भी बड़े हो गए । कथा सुनते सुनते कान बहरे हो गए , फिर भी ब्रह्म ज्ञान नहीं मिला।)* *एक मूरख ने एवी टेव, पत्थर एटला पूजे देव।* *तुलसी देखी तोड़े पान , पानी देखी करें स्नान॥* *(अर्थात-- एक मूर्ख को ऐसी आदत थी कि जितने पत्थर देखें ,उसको भगवान समझकर पूजन करें , तुलसी देखकर पत्ते तोड़ने लगे ,और पानी देखकर स्नान करने लगे।* *फिर भी उसका भव रोग मिटेगा नहीं , क्योंकि वह उपरोक्त परहेज का पालन करें तो उसको रोग होगा ही नहीं। इसलिए दवाई कि उसको आवश्यकता ही नहीं रहेगी।* *और परहेज का पालन नहीं करता तो फिर दवाई लेने की भी आवश्यकता नहीं । क्योंकि दवाई उसे कोई फायदा ही नहीं देगी ,, उपरोक्त परहेजी का अगर ठीक ढंग से पालन करता है तो,, राम नाम लो ,, या ना लो ,, दोनों समान। कुत्ते, बिल्ली , घोड़े , गधे , पशु, पक्षी ,चींटी ,मकोड़े आदि राम नाम नहीं लेते ,, किंतु सब जीवो पर भगवान की तो बराबर एक जैसी ही कृपा रहती है* *भक्त कवि आगे एक दूसरी जबरदस्त परहेज बताता है वह परेज इस तरह है---* *मैं हरि का हरि मेरे रक्षक, ये ही भरोसा नहीं जाए कभी।* *जो हरि करि है सो मेरे हित, यह निश्चय नहीं जाए कभी॥* *( अर्थात) मै हरि का ,, हरि है मेरा रक्षक ,, यह भरोसा जाए नहीं ,, जो हरि करेगा, वह मेरे हित के लिए ही करेगा ,, इस निश्चय में तब्दीली नहीं होनी चाहिए।* क्रमश: आगे अब नया भाग ✍🏽 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
sn vyas
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1 months ago
🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग१० 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🥰 क्रियमाण कर्म करने के पद्धति 🥰 सतोगुण , रजोगुण और तमोगुण तीनों प्रकार के जीवों के लिए क्रियमाण कर्म करने की पद्धति भी अलग-अलग होती है, कर्म का फल तो तीनों प्रकार के जीवो को अवश्य ही मिलेगा , किंतु ;* *सतोगुणी जीव कहता है* *मैं कर्म करूंगा फल मिले या न मिले* *रजोगुणी जीव कहता है* *मैं कर्म करुगा किंतु फल नहीं छोडूंगा* *तमोगुणी जीव कहता है* *फल न मिले तब तक मैं कर्म नहीं करूंगा* *एक आदमी का बेटा अचानक रात्रि को बारह बजे बीमार पड़ गया, वह आदमी आधी रात को डॉक्टर को विजिट के लिए बुलाने गया, डॉक्टर सतोगुणी था, उसने निंद्रा में से उठकर जाना कि इस आदमी का बेटा सख्त बीमार है, तुरंत ही दवाई तथा इंजेक्शन की बैग लेकर विजिट के लिए तैयार हो गया।* *उस आदमी ने डॉक्टर को विजिट फीस के संबंध में पूछा ? किंतु सतोगुणी डॉक्टर ने कहा--- कि विजिट फीस की बात बाद में, पहले तेरे बेटे का दर्द मिटाने दे,,, विजिट फीस तो उसको मिलने वाली ही है,* *किंतु सतोगुणी जीव कहता है--- कि मैं दर्द मिटा ऊगा , विजिट फीस मिले या ना मिले ।* *यह डॉक्टर अगर रजोगुणी होता तो ऐसा कहता कि दर्द मिटा ऊगा किंतु मेरी विजिट फीस दस रुपये देने पड़ेंगे* *यह डॉक्टर अगर तमोगुणी होता तो ऐसा कहता कि पहले बजट के दस रुपये रख दो फिर मैं आऊंगा।* *तीनों की विजिट फीस तो मिलेगी ही , किंतु तीनों की क्रियमाण कर्म करने की पद्धति में फर्क पड़ेगा ,* *यानी वह आदमी सतोगुणी डॉक्टर को खुश होकर ₹10 देगा और तमोगुणी डॉक्टर को मन में संकोच से ₹10 देगा* *सतोगुणी, रजोगुणी और तमोगुणी, माल खरीदने जाएं , उसमें भी ऐसा ही होता है। आप घी खरीदने जाएं तो घी का व्यापारी कहेगा--- कि भाई घी ठीक से चख लेना, सूंघ लेना, पसंद पड़े तो लेना और घी लेकर घर जाने के बाद थोड़ा इस्तेमाल करने के बाद भी पसंद नहीं पड़ेगा तो बचा हुआ कि वापस कर देना। और पैसे वापस ले जाना।* *रजोगुण वस्तु खरीदने जाओ। रेडियो, क्रोकरी ट्यूबलाइट ,इलेक्ट्रॉनिक , का सामान आदि रजोगुणी भौतिक सुख के साधन खरीदेंगे तो व्यापारी उसके बिल में छप कर ही देगा , कि माल एक दफे लेकर दुकान की सीढ़ी उतरकर घर जाने के बाद माल में किसी प्रकार का टूट-फूट अगर खराबी निकले तो माल वापस नहीं लिया जाएगा और पैसे भी वापस नहीं मिलेंगे।* *तमोगुणी चीज लेने जाओगे तो व्यापारी पहले पैसे लिए बिना माल दिखाएगा ही नहीं। सिनेमा वाला ऐसा ही कहेगा कि टिकट खिड़की से नगद पैसा देकर टिकट खरीद लो, फिर सिनेमा में अंधेरे में बैठकर अगर आपको पसंद पड़े तो देखो या चलते बनो।पैसे तो पहले ही ले लेगा* *वैद्य , वेश्या और वकील पहले पैसा हाथ में ना आने तक तो आपके साथ बात भी नहीं करेंगे , पहले पैसे रख दो फिर आपके सामने देखेंगे।* विश्राम ... क्रमश ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ