श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ

sn vyas
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5 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४२/२ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 कर्म -भक्ति - ज्ञान योग समन्वय: गतांक से आगे एक विद्यार्थी को परीक्षा में "गधे " पर निबंध लिखने को कहा जाए तो वह निबंध लिखने की क्रिया उसका कर्म योग कहलाएगा । *लिखते समय कागज का आगे का हिस्सा छोड़कर व सुंदर अक्षरों में निबंध लिखें और कहीं भी धब्बा न पड़ने दें तो यह उसका भक्तियोग कहलाएगा ।* *इसके बाद गधे के दो लंबे कान होते हैं , चार पैर होते हैं, एक पूछ होती है , आदि यथार्थ सूचना लिखें तो यह उसका ज्ञानयोग कहलाएगा।* *इस प्रकार कर्मयोग , ज्ञानयोग , भक्तियोग तीनों का समन्वय होगा तो ही उसे दस में से नौ अंक मिलेंगे , अन्यथा नहीं मिलेंगे।* *विद्यार्थी गधे पर निबंध लिखने का कर्मयोग करें , किंतु कागज का आगे का हिस्सा खाली न रखें , गंदे अक्षरों में लिखे , कागज पर धब्बे पड़े अर्थात उसमें भक्तियोग न हो या गधे के संबंध में उसे सही जानकारी न हो अर्थात ज्ञानयोग न हो अथवा भक्तियोग, ज्ञानयोग हो , किंतु कर्मयोग ही न हो अर्थात परीक्षा पेपर कोरा रखकर आए तो वह अनुत्तीर्ण ही होगा ।* *ऐसा ही जीव के प्रत्येक कर्म में समझना चाहिए।* *मेरा कपड़ा (अंतरपट) मैला है , मुझे उस को स्वच्छ बनाना हो , मैं उसमें केवल साबुन (ज्ञानयोग) घिसू तो कपड़ा फट जाएगा । इसी प्रकार शुष्क वेदांत भी अंतरपट के टुकड़े-टुकड़े कर देता है और व्यक्ति को सिर्फ वेदांती बना देता है । मुझे पहले तो अंतरपट (कपड़े) को भक्ति की सरलता में भिगोना पड़ेगा, फिर उसमें ज्ञानयोग का साबुन लगाना पड़ेगा और उसके बाद उस पर कर्मयोग की चोट करनी पड़ेगी , तब ही कपड़ा ( अंत:करण) शुद्ध होगा ।* *गीता में ऐसे बहुत से सारे गूढ रहस्य हैं । उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण से अर्थघठन करके जीवन जीने की कला सीखनी है । केवल मरने की राह देख कर बैठे वृद्ध और साधू सन्यासियों के लिए गीता नहीं लिखी गई है।* क्रमश: कल इससे आगे पड़ेंगे ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
sn vyas
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7 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४२/१ कर्म - भक्ति - ज्ञान योग समन्वय :* उपरोक्त दृष्टि में गीता एक योग शास्त्र है । इसमें योग के तीन प्रकार बताए गए हैं :* (1) कर्मयोग (2) भक्तियोग (3) ज्ञान योग । *जीवन में केवल ज्ञानयोग, केवल भक्तियोग या केवल कर्मयोग काम नहीं आता है। इन तीनों योगो का समन्वय होने पर ही जीवन सुंदर बनता है और तब ही प्रत्येक कर्म प्रकाशमान होता है।* *केवल ज्ञानयोग व्यक्ति को शुष्क वेदांती बना सकता है। "अहम् ब्रह्मास्मि सर्वं खलु इदं ब्रह्म " ऐसा कहने वाले को पागलों के अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा ।* *केवल भक्तियोग व्यक्ति को बुजदिल बना सकता है, वह जिम्मेदारियों से मुक्त होने की आकांक्षा में भटक सकता है और कितनों को ही भटका भी सकता है ।* *केवल कर्मयोगी भी जिम्मेदारियों और पाप की गठरी उठाये घूमेगा ।* *इसलिए प्रत्येक कर्म में कर्म योग , भक्तियोग , ज्ञानयोग का विवेकपूर्ण समन्वय होगा तो ही वह कर्म विशेष बनेगा।* *उदाहरण के लिए एक स्त्री घर में दाल आदि भोजन बनाती है । दाल बनाने की क्रिया करना उसका कर्मयोग हुआ ।* *किंतु यह दाल मेरा पति खाएगा , मेरा पुत्र खाएंगे , मेरे अतिथि खाएंगे , इस भक्ति भाव से दाल को अच्छी तरह से दो- तीन बार धोकर , बर्तन को अच्छी तरह से साफ करके उपयोग करेगी , पानी भी स्वच्छ कपड़े से छानकर उपयोग करेगी , तो उसका भक्ति योग होगा ।* *और दाल के प्रमाण में कितना नमक डालना है, कितनी मिर्ची डालनी है , कितनी इमली , गुड आदि मसाला डालना है , दाल कितने देर तक उबालना है ।इसका ध्यान रखना उसका ज्ञानयोग होगा ।* *इस प्रकार कर्मयोग , भक्ति योग तथा ज्ञानयोग में तीनों का समन्वय होगा तो ही दाल बनने की क्रिया में सफलता मिलेगी, अन्यथा नहीं । वैसे तो होटलों में भी स्वादिष्ट दाल बनते हैं। लेकिन उनमें केवल कर्मयोग और ज्ञानयोग ही होता है । भक्तियोग नहीं होता , इसलिए उसमें मक्खियां भी उबाल देते हैं।* क्रमश: कल इसका दुसरा भाग ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
sn vyas
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12 days ago
#कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta 🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_३९/२ मुझे कर्म भी नहीं करना है और फल भी नहीं भोगना है: गतांक से आगे *मैं अर्जुन के सारथी का काम कर रहा हूं तो मुझे इससे कुछ मिलने वाला नहीं है। मैं जो काम कर रहा हूं , वह करूं या ना करूं तो भी मेरे आनंद में कोई घट-बढ नहीं होने वाली है। फिर भी मैं लोक संग्रह को दृष्टि में रखकर काम करता हूं। अगर भगवान श्री कृष्ण स्नान, संध्या , देव पूजा आदि नहीं करेंगे तो जगत के लोग भी ऐसे कर्मों से विमुख हो जाएंगे।* *भगवान ने इस बात को गीता में स्पष्ट रूप से कहा है।* *महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था । उस समय भगवान श्री कृष्ण द्वारका में बैठे-बैठे आराम करते और मौज मस्ती करते तो क्या हर्ज था ? पांडवों के जीतने से श्रीकृष्ण को किसी गांव और जागीर या कोई अन्य इनाम नहीं मिलने वाला था ।* *कौरवों की जीत होती तो भगवान श्री कृष्ण को द्वारका की गद्दी पर कोई आंच भी नहीं आने वाली थी । फिर भी भगवान श्रीकृष्ण क्यों बेकार में इस उपाधि में पड़े और उन्होंने द्वारका से कुरुक्षेत्र तक प्रयाण करने का कष्ट क्यों उठाया ? द्वारका में बैठकर आराम नहीं कर सकते थे ? लेकिन नहीं ,, जब धर्म युद्ध हो रहा हो तब भगवान श्री कृष्ण जैसे योगीश्वर और कर्मयोगी बैठे रह कर केवल देखते नहीं रह सकते।* क्रमश: ✍🏽
sn vyas
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1 months ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२८/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 भगवान प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते है ? 🦚 गतांक से आगे श्री भगवान राम स्वयं कहते हैं ---- मैं जिस दिन चक्रवर्ती राजा होने वाला था ,और सिंहासन पर बैठने वाला था, उसी दिन सुबह मुझे कर्म के कायदे को मान देकर , जटाधारी तपस्वी के वेश में बन में जाना पड़ा है ,,, *भगवान राम उनके पिता दशरथ को ,, पुत्र के वियोग से होने वाले मृत्यु रूपी प्रारब्ध भोगने में मदद न कर सके। उनको कम से कम चौदह वर्ष भी पुन: जीवन दे सके नहीं।* *जिस राम के चरण रज के स्पर्श मात्र से शल्या की अहिल्या हो सकी ,,, पत्थर को भी जो जीवन दान दे सकें,,, वे भगवान खुद अपने पिता को जीवनदान दे सके नहीं ,,,, क्योंकि अहिल्या के पाप पूर्ण हो गए थे । उसका प्रारब्ध जीवन दान देने को तैयार हो गया था । जबकि राजा दशरथ ने श्रवण का वध किया था । वह पाप प्रारब्ध बनकर दशरथ को फल देने के लिए सामने खड़ा था । उसमें खुद भगवान भी हस्तक्षेप नहीं करते।* *गवर्नर ने कायदा किया हो कि वाहन बायी ओर से चलाना ,,, फिर खुद गवर्नर ही अपनी मोटर दाहिनी ओर से चलाएं तो छोटे से छोटा पुलिस भी उनकी मोटर को रोक सकता है। उसमें गवर्नर का कुछ भी नहीं चलेगा।* *भगवान के बनाए हुए कर्म के कायदे का सख्त पालन हो ऐसा भगवान चाहते हैं । तो मानव को उनकी आज्ञा अनुसार भक्ति योग के द्वारा अपने प्रारब्ध कर्म को भोग लेना चाहिए।* क्रमश: अब आगे कल नया भाग ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta