sn vyas
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#पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भस्मासुर एक अत्यंत शक्तिशाली दानव था। उसने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। जब महादेव प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा, तो उसने वरदान मांगा—"हे प्रभु! मैं जिसके भी सिर पर अपना हाथ रखूँ, वह तुरंत जलकर भस्म हो जाए।" महादेव ने उसकी भक्ति देखकर बिना परिणाम सोचे उसे यह वरदान दे दिया। भस्मासुर की दुष्टता और महादेव का संकट वरदान मिलते ही भस्मासुर के मन में कुटिलता आ गई। उसने वरदान की सत्यता की जांच करने के लिए स्वयं महादेव के सिर पर ही हाथ रखने का प्रयास किया। शिव जी वहां से भागे और भस्मासुर उनके पीछे पड़ गया। संपूर्ण ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। अंततः महादेव सहायता के लिए भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। मोहिनी रूप और भस्मासुर का अंत भगवान विष्णु ने संकट को भांपकर एक अत्यंत सुंदर नर्तकी 'मोहिनी' का रूप धारण किया और भस्मासुर के मार्ग में आ गए। मोहिनी के अप्रतिम सौंदर्य को देखकर भस्मासुर मोहित हो गया और सब कुछ भूलकर उसके साथ नृत्य करने की इच्छा व्यक्त की। मोहिनी ने शर्त रखी कि भस्मासुर को ठीक वैसे ही नृत्य करना होगा जैसे वह करेगी। कामांध भस्मासुर तुरंत तैयार हो गया। नृत्य करते-करते मोहिनी ने एक ऐसी मुद्रा बनाई जिसमें हाथ स्वयं के सिर पर रखा जाता है। भस्मासुर मोहिनी की चाल में फंस गया और उसने भी बिना सोचे-समझे अपना हाथ अपने ही सिर पर रख लिया। वरदान के प्रभाव से भस्मासुर उसी क्षण जलकर भस्म हो गया और महादेव का संकट टल गया।
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