sn vyas
557 views 1 days ago
#पौराणिक कथा महाराज रघु के पुत्र राजा अज की कथा रघुकुल के इतिहास में सबसे भावुक और हृदयस्पर्शी मानी जाती है। जहाँ रघु अपनी वीरता और दान के लिए जाने गए, वहीं उनके पुत्र अज अपनी न्यायप्रियता और अपनी पत्नी इन्दुमती के प्रति अटूट प्रेम के लिए प्रसिद्ध हुए। कालिदास के 'रघुवंशम्' में इस कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है: विदर्भ देश की राजकुमारी इन्दुमती अत्यंत सुंदर और गुणवान थीं। उनके स्वयंवर में दूर-दूर के प्रतापी राजा आए थे। जब इन्दुमती हाथ में वरमाला लेकर राजाओं की पंक्तियों के बीच से गुजरीं, तो वे ऐसी लग रही थीं जैसे रात के समय चलती हुई मशाल, जिसके आगे बढ़ते ही पीछे के राजा अंधकार (निराशा) में डूब जाते थे। जब वे राजकुमार अज के सामने पहुँचीं, तो अज के तेज और सौम्यता को देखकर उन्होंने उन्हें अपना पति चुन लिया स्वयंवर में आए अन्य राजा अज की सफलता से ईर्ष्या करने लगे। जब अज इन्दुमती को लेकर अयोध्या लौट रहे थे, तो उन राजाओं ने मिलकर उन पर आक्रमण कर दिया। युवा अज ने अकेले ही अपनी वीरता से उन सबको परास्त किया और गौरव के साथ अयोध्या में प्रवेश किया। राजा अज और इन्दुमती का जीवन सुखमय बीत रहा था। उन्हें दशरथ के रूप में एक प्रतापी पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन एक दिन, जब वे उपवन में विहार कर रहे थे, एक विचित्र घटना घटी। आकाश मार्ग से देवर्षि नारद जा रहे थे। उनकी वीणा पर चढ़ी हुई दिव्य पुष्पों की माला (सुरपुष्प) हवा के झोंके से नीचे गिर गई। वह माला सीधे इन्दुमती के हृदय पर गिरी। वह माला सामान्य नहीं थी; उसके स्पर्श मात्र से इन्दुमती के प्राण पखेरू उड़ गए। वह वास्तव में एक अप्सरा थीं, जिन्हें एक श्राप के कारण मृत्युलोक में आना पड़ा था और उस दिव्य माला के स्पर्श से उनका श्राप समाप्त हो गया। अपनी प्रिय पत्नी के अचानक बिछड़ जाने से राजा अज टूट गए। उनका विलाप इतना मार्मिक था कि पत्थर भी पिघल जाएँ। उन्होंने अपनी पत्नी के शव को गोद में लेकर पूछा— "हे प्रिये! जो फूल अत्यंत कोमल हैं, वे तुम्हारे प्राण कैसे ले सकते हैं? यदि विधाता को तुम्हें ले जाना ही था, तो मुझे भी साथ क्यों नहीं ले गया?" इन्दुमती के विरह में अज ने राज-काज से मन हटा लिया। उन्होंने अपने पुत्र दशरथ का राज्याभिषेक किया। अंत में, उन्होंने सरयू नदी के संगम पर जाकर उपवास के माध्यम से अपना शरीर त्याग दिया और स्वर्ग में पुनः अपनी प्रिय इन्दुमती से जा मिले। राजा अज की यह कहानी दिखाती है कि रघुकुल के राजा केवल कठोर योद्धा ही नहीं थे, बल्कि उनके भीतर प्रेम और संवेदना की भी गहरी धारा बहती थी। राजा अज के इसी वंश में आगे चलकर महाराजा दशरथ हुए और फिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम।
14 likes
14 shares

More like this