sn vyas
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#महाभारत #श्रीमहाभारतकथा-4️⃣2️⃣6️⃣ श्रीमहाभारतम् 〰️〰️🌼〰️〰️ ।। श्रीहरिः ।। * श्रीगणेशाय नमः * ।। श्रीवेदव्यासाय नमः ।। (जतुगृहपर्व) त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः दुर्योधन के आदेश से पुरोचन का वारणावत नगर में लाक्षागृह बनाना...(दिन 426) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ वैशम्पायन उवाच एवमुक्तेषु राज्ञा तु पाण्डुपुत्रेषु भारत । दुर्योधनः परं हर्षमगच्छत् स दुरात्मवान् ।। १ ।। स पुरोचनमेकान्तमानीय भरतर्षभ । गृहीत्वा दक्षिणे पाणौ सचिवं वाक्यमब्रवीत् ।। २ ।। ममेयं वसुसम्पूर्णा पुरोचन वसुंधरा । यथेयं मम तद्वत् ते स तां रक्षितुमर्हसि ।। ३ ।। न हि मे कश्चिदन्योऽस्ति विश्वासिकतरस्त्वया । सहायो येन संधाय मन्त्रयेयं यथा त्वया ।। ४ ।। वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय ! जब राजा धृतराष्ट्रने पाण्डवोंको इस प्रकार वारणावत जानेकी आज्ञा दे दी, तब दुरात्मा दुर्योधनको बड़ी प्रसन्नता हुई। भरतश्रेष्ठ ! उसने अपने मन्त्री पुरोचनको एकान्तमें बुलाया और उसका दाहिना हाथ पकड़कर कहा, 'पुरोचन ! यह धन-धान्यसे सम्पन्न पृथ्वी जैसे मेरी है, वैसे ही तुम्हारी भी है; अतः तुम्हें इसकी रक्षा करनी चाहिये। मेरा तुमसे बढ़कर दूसरा कोई ऐसा विश्वासपात्र सहायक नहीं है, जिससे मिलकर इतनी गुप्त सलाह कर सकूँ, जैसे तुम्हारे साथ करता हूँ ।। १-४ ।। संरक्ष तात मन्त्रं च सपत्नांश्च ममोद्धर । निपुणेनाभ्युपायेन यद् ब्रवीमि तथा कुरु ।। ५ ।। 'तात! तुम मेरी इस गुप्त मन्त्रणाकी रक्षा करो-इसे दूसरोंपर प्रकट न होने दो और अच्छे उपायद्वारा मेरे शत्रुओंको उखाड़ फेंको। मैं तुमसे जो कहता हूँ, वही करो ।। ५ ।। पाण्डवा धृतराष्ट्रण प्रेषिता वारणावतम् । उत्सवे विहरिष्यन्ति धृतराष्ट्रस्य शासनात् ।। ६ ।। 'पिताजीने पाण्डवोंको वारणावत जानेकी आज्ञा दी है। वे उनके आदेशसे (कुछ दिनोंतक) वहाँ रहकर उत्सवमें भाग लेंगे- मेलेमें घूमे-फिरेंगे ।। ६ ।। स त्वं रासभयुक्तेन स्यन्दनेनाशुगामिना । वारणावतमहद्यैव यथा यासि तथा कुरु ।। ७ ।। 'अतः तुम खच्चर जुते हुए शीघ्रगामी रथपर बैठकर आज ही वहाँ पहुँच जाओ, ऐसी चेष्टा करो ।। ७ ।। तत्र गत्वा चतुःशालं गृहं परमसंवृतम् । नगरोपान्तमाश्रित्य कारयेथा महाधनम् ।। ८ ।। 'वहाँ जाकर नगरके निकट ही एक ऐसा भवन तैयार कराओ जिसमें चारों ओर कमरे हों तथा जो सब ओरसे सुरक्षित हो। वह भवन बहुत धन खर्च करके सुन्दर-से-सुन्दर बनवाना चाहिये ।। ८ ।। शणसर्जरसादीनि यानि द्रव्याणि कानिचित् । आग्नेयान्युत सन्तीह तानि तत्र प्रदापय ।। ९ ।। 'सन तथा राल आदि, जो कोई भी आग भड़काने वाले द्रव्य संसार में हैं, उन सबको उस मकान की दीवारों में लगवाना ।। ९ ।। क्रमशः... साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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