sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२६/१ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 ग्रह -नक्षत्र प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते हैं ? 🦚 *मनुष्य का जैसा प्रारब्ध निर्माण हुआ हो उस प्रकार के ग्रह नक्षत्रों की उसके जन्म के समय रचना हो जाती है। और उसके जीवन काल दरमियान शुभ या अशुभ प्रारब्ध भोगने के लिए ग्रह और नक्षत्रों की गति होती है ।* *उसकी गिनती करके मनुष्य के जीवन में कौन सा समय अच्छा या बुरा है ,, वह सच्चे ज्योतिष देखने वाले शायद जान सकते हैं ,,, और बुरे समय में मनुष्य जागृत रहकर पहले से सावधान होकर उस समय दरमियान शुभ कर्मों में अधिक प्रवृत रहे,,, इसलिए ज्योतिष शास्त्र जीव को कल्याणकारी प्रवृत्तियों में लगाने के लिए मार्गदर्शन करता है ,,, और इस तरह मनुष्य कल्याणकारी प्रवृत्ति करते रहने से उसको ग्रह नक्षत्र से डरने की आवश्यकता नहीं रहती ।* *राहु , केतु , गुरु , मंगल, बुध आदि ग्रह बहुत पवित्र , नीतिमान, प्रमाणिक अधिकारी ,, कर्म के कायदे में अमल करने के लिए नियुक्त है,, जो कर्म के कायदे की मर्यादा में रहकर जीव को शुभ अशुभ प्रारब्ध भुक्ताते हैं,,, प्रमाणिक अधिकारी दुनिया के दूसरे कुछ अधिकारियों की तरफ लालची या घूसखोर नहीं है ,,,* *सारी जिंदगी मंगलवार को आप एक टाइम भोजन करो, और शुक्रवार को केवल चने खाकर रहो , या शनिवार को उड़द खाते रहो , फिर भी प्रारब्ध तो भोगना ही पड़ेगा,, व्रत उपवास करने से उस समय जीव पाप कर्म करने से अटकता है ,, इतना उसका फायदा होता है , किंतु यह ग्रह नक्षत्र जीव को प्रारब्ध में से संपूर्ण मुक्ति नहीं दे सकते।* क्रमशः शेष भाग कल ✍🏽 #कर्म #धर्म कर्म #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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