sn vyas
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#@श्रीमद्भागत्_महापुराण01 📕श्रीमद्भागवतमहापुराण कथा का शुभारम्भ 📢।।*_ 📕 ( दुख से मुक्ति का मार्ग ) 🛐भगवान श्रीकृष्ण की असीम कृपा से *आज से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथा का पवित्र आरम्भ होने जा रहा हैं।* व्हाट्सएप्प पर चलने वाला विश्वविख्यात अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक समूह *आध्यात्मिक ज्ञान*को आज ही ज्वाइन करे। जो लोग दुख, क्लेश, पीड़ा, अनहोनी, दरिद्रता जैसे दु:खज्वर की ज्वाला से दग्ध हो रहे हैं, जिन्हें माया-पिशाची ने रौंद डाला है तथा जो संसार-समुद्र में डूब रहे हैं, उनका कल्याण करने के लिये *श्रीमद्भागवतमहापुराण* सिंहनाद कर रहा है।🛐 👩‍❤️‍👩आइए, इस दिव्य अवसर का लाभ उठाएँ। जो पहले से समूह में हैं, वे बने रहें और अपने परिचितों को भी जोड़ें ( खासकर अपने बच्चों को अवश्य जोड़ें )। कृपया अपने मित्रों, परिचितों और रिश्तेदारों को इस समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे भी इस अमृत वाणी का लाभ उठा सकें। इस पोस्ट को यथावत शेयर करते रहें और उन्हें नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके समूह से जुड़ने के लिए कहें। ************************** 📕श्रीमद्भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध*_ 📕 _पहला अध्याय ( पोस्ट - 01 )_ ।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। ⁉️श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्र ⁉️ 🪴*मङ्गलाचरण* 🪴 _जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतः चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट्।_ _तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः।_ _तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा।_ _धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि । १ ॥_ ✍️जिससे इस जगत् की सृष्टि, स्थिति और प्रलय होते हैं—क्योंकि वह सभी सद्रूप पदार्थों में अनुगत है और असत् पदार्थों से पृथक् है; जड नहीं, चेतन है; परतन्त्र नहीं, स्वयं प्रकाश है; जो ब्रह्मा अथवा हिरण्यगर्भ नहीं प्रत्युत उन्हें अपने संकल्प से ही जिसने उस वेद ज्ञान का दान किया है; जिसके सम्बन्ध में बड़े-बड़े विद्वान् भी मोहित हो जाते हैं; जैसे तेजोमय सूर्यरश्मियों में जल का, जल में स्थल का और स्थल में जल का भ्रम होता है, वैसे ही जिसमें यह त्रिगुणमयी जाग्रत्-स्वप्न-सुषुप्तिरूपा सृष्टि मिथ्या होने पर भी अधिष्ठान-सत्ता से सत्यवत् प्रतीत हो रही है, उस अपनी स्वयंप्रकाश ज्योति से सर्वदा और सर्वथा माया और मायाकार्य से पूर्णत: मुक्त रहने वाले परम सत्यरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं ॥ १ ॥✍️ 🙏हरिः ॐ तत्सत्🙏 *क्रमशः ......* ###श्रीमद्भागवत् महापुराण@sn7873
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