sn vyas
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###श्रीमद्भागवत् महापुराण@sn7873 #2026श्रीमद्भागत्_महापुराण02 श्रीमद्भागवतमहापुराण प्रथम स्कन्ध पहला अध्याय ( पोस्ट - 02 ) ।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्र गत पोस्ट से आगे .... मङ्गलाचरण धर्मः प्रोज्झितकैतवोऽत्र परमो निर्मत्सराणां सतां। वेद्यं वास्तवमत्र वस्तु शिवदं तापत्रयोन्मूलनम्। श्रीमद्‍भागवते महामुनिकृते किं वा परैरीश्वरः। सद्यो हृद्यवरुध्यतेऽत्र कृतिभिः शुश्रूषुभिः तत् क्षणात्॥ २ ॥ महामुनि व्यासदेव के द्वारा निर्मित इस श्रीमद्भागवतमहापुराण में मोक्ष पर्यन्त फल की कामना से रहित परम धर्म का निरूपण हुआ है। इसमें शुद्धान्त:करण सत्पुरुषों के जानने योग्य उस वास्तविक वस्तु परमात्मा का निरूपण हुआ है, जो तीनों तापों का जड़ से नाश करने वाली और परम कल्याण देने वाली है । अब और किसी साधन या शास्त्र से क्या प्रयोजन । जिस समय भी सुकृती पुरुष इसके श्रवण की इच्छा करते हैं, ईश्वर उसी समय अविलम्ब उनके हृदय में आकर बन्दी बन जाता है ॥ २ ॥ निगमकल्पतरोर्गलितं फलं।शुकमुखाद् अमृतद्रवसंयुतम्।पिबत भागवतं रसमालयं।मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः ॥ ३ ॥ रस के मर्मज्ञ भक्तजन ! यह श्रीमद्भागवत वेदरूप कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है। श्री शुकदेवरूप तोते के मुख का सम्बन्ध हो जाने से यह परमानन्दमयी सुधा से परिपूर्ण हो गया है। इस फल में छिलका, गुठली आदि त्याज्य अंश तनिक भी नहीं है। यह मूर्तिमान् रस है। जब तक शरीर में चेतना रहे, तब तक इस दिव्य भगवद्-रस का निरन्तर बार-बार पान करते रहो। यह पृथ्वी पर ही सुलभ है॥ *यह प्रसिद्ध है कि तोते का काटा हुआ फल अधिक मीठा होता है। 🙏हरिः ॐ तत्सत् 🙏🙌🙇 क्रमशः .....
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