sn vyas
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###श्रीमद्भागवत् महापुराण@sn7873 #2026श्रीमद्भागवत्_महापुराण09 ।। श्रीमद्भागवतमहापुराणम् ।। प्रथमः स्कन्धः अथ प्रथमोऽध्यायः गत पोस्ट से आगे ..... ⁉️श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्न ⁉️ ( दिए गए संस्कृत श्लोक के नीचे उसका हिंदी अर्थ दिया गया है। ) अथाख्याहि हरेर्धीमन् अवतारकथाः शुभाः। लीला विदधतः स्वैरं ईश्वरस्यात्ममायया॥ १८ ॥ *वयं तु न वितृप्याम उत्तमश्लोकविक्रमे।* *यत् श्रृण्वतां रसज्ञानां स्वादु स्वादु पदे पदे॥ १९ ॥* *कृतवान् किल वीर्याणि सह रामेण केशवः।* *अतिमर्त्यानि भगवान् गूढः कपटमानुषः॥ २० ॥* *कलिमागतमाज्ञाय क्षेत्रेऽस्मिन् वैष्णवे वयम्।* *आसीना दीर्घसत्रेण कथायां सक्षणा हरेः॥ २१ ॥* *त्वं नः संदर्शितो धात्रा दुस्तरं निस्तितीर्षताम्।* *कलिं सत्त्वहरं पुंसां कर्णधार इवार्णवम्॥ २२ ॥* *ब्रूहि योगेश्वरे कृष्णे ब्रह्मण्ये धर्मवर्मणि।* *स्वां काष्ठामधुनोपेते धर्मः कं शरणं गतः॥ २३ ॥* 🧘बुद्धिमान् सूतजी ! सर्वसमर्थ प्रभु अपनी योग-माया से स्वच्छन्द लीला करते हैं। आप उन श्रीहरि की मङ्गलमयी अवतार-कथाओं का अब वर्णन कीजिये ॥ १८ ॥ पुण्य कीर्ति भगवान्‌ की लीला सुनने से हमें कभी भी तृप्ति नहीं हो सकती; क्योंकि रसज्ञ श्रोताओं को पद-पदपर भगवान्‌ की लीलाओं में नये-नये रस का अनुभव होता है ॥ १९ ॥ भगवान्‌ श्रीकृष्ण अपने को छिपाये हुए थे, लोगों के सामने ऐसी चेष्टा करते थे मानो कोई मनुष्य हों। परन्तु उन्होंने बलरामजी के साथ ऐसी लीलाएँ भी की हैं, ऐसा पराक्रम भी प्रकट किया है, जो मनुष्य नहीं कर सकते ॥ २० ॥ *कलियुग को आया जानकर इस वैष्णव क्षेत्र में हम दीर्घकालीन सत्र का संकल्प करके बैठे हैं।* श्रीहरि की कथा सुनने के लिये हमें अवकाश प्राप्त है ॥ २१ ॥ यह कलियुग अन्त:करण की पवित्रता और शक्ति का नाश करने वाला है। इससे पार पाना कठिन है। जैसे समुद्र से पार जाने वालों को कर्णधार मिल जाय, उसी प्रकार इससे पार पाने की इच्छा रखने वाले हम लोगों से ब्रह्माने आपको मिलाया है ॥ २२ ॥ धर्मरक्षक, ब्राह्मणभक्त, योगेश्वर भगवान्‌ श्रीकृष्ण के अपने धाम में पधार जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है—यह बताइये ॥ २३ ॥ *इति श्रीमद्‌भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां प्रथमस्कन्धे नैमिषीयोपाख्याने प्रथमोऽध्यायः॥ १ ॥* 🧘 जय श्री कृष्ण क्रमशः .....
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