sn vyas
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###श्रीमद्भागवत् महापुराण@sn7873 #2026श्रीमद्भागवत्_महापुराण05 ।। श्रीमद्भागवतमहापुराण ।। ‼️कल के पोस्ट में हम सभी ने महर्षि वेदव्यास और शुकदेवजी के ज्ञानवर्धक संवाद तथा श्रीमद्भागवतमहापुराण की दिव्य उत्पत्ति की कथा पढ़ी। उस कथा से यह स्पष्ट हुआ कि केवल ज्ञान, वैराग्य या कर्मकांड पर्याप्त नहीं हैं—भगवत्-प्रेम और भगवान की लीलाओं का रस ही हृदय को पूर्ण तृप्ति देता है।‼️ ⁉️*अब प्रश्न उठता है कि—* _*हमसभी को श्रीमद्भागवत महापुराण क्यों पढ़नी चाहिए?*⁉️ 👩‍❤️‍👩बहुत से लोग यह मानते हैं कि धर्मग्रंथ केवल वृद्धावस्था में समय काटने के लिए होते हैं। वे भी श्रीमद्भागवतमहापुराण जैसे दिव्य ग्रंथ को दूर रखते हैं। परंतु सत्य बिल्कुल विपरीत है—श्रीमद्भागवत हर मनुष्य का पथप्रदर्शक ग्रंथ है और जीवन के हर चरण में मार्गदर्शन देने वाला अमृत है। यह ग्रंथ जीवन की गहन कहानी है। इसमें जीवन-प्रबंधन के गूढ़ सूत्र छिपे हैं जो प्रत्येक मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। महर्षि वेदव्यास ने इसकी रचना करते समय समस्त मानव जाति को केंद्र में रखा। इसीलिए इस पूरे ग्रंथ के दो मुख्य सूत्रधार भी मनुष्य ही हैं:-👩‍❤️‍👩 🚩- राजा परीक्षित, जिन्होंने यह कथा सुनी, और महर्षि वेदव्यास के पुत्र शुकदेवजी, जिन्होंने यह कथा सुनाई।🚩 📕श्रीमद्भागवत को पढ़ने से यह संदेश मिलता है कि यदि मनुष्य अपने लक्ष्य को सही समय पर पहचान ले, तो वह कम समय में महान सफलता प्राप्त कर सकता है और जीवन के सारे सुखों का अनुभव भी कर सकता है। *आज जब मन में अशांति हो, सही रास्ता न सूझ रहा हो या जीवन के सामान्य डर घेर रहे हों, तब श्रीमद्भागवत का पाठ और उसमें छिपे सूत्रों का चिंतन अद्भुत परिवर्तन लाता है। इससे भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित होती है, जो जीवन को पूर्णतया बदल देती है।* 📕 🙏इसीलिए श्रीमद्भागवत सभी को क्यों पढ़नी चाहिए, यह स्पष्ट हो जाता है ऊपर लिखी हुई बातों से और ये भी कह सकते हैं कि *युवा* - कैसे रहे ये जानने के लिए ? *वृद्ध* - कैसे मरे ये जानने के लिए ? *अज्ञानी* - ज्ञान के लिए। *सीखा हुआ* - विनम्रता के लिए। *अमीर* - करुणा के लिए।*गरीब* - आराम के लिए। *स्वप्नहार* - आकर्षण के लिए। *व्यावहारिक* - वकील के लिए। *कमजोर* - शक्ति के लिए। *मजबूत* - दिशा के लिए। *अभिमानी* - चेतावनी के लिए। *विनम्र* - उदात्त के लिए। *परेशान* - शांति के लिए। *थके हुए* - आराम के लिए। *संदेह* - आश्वासन के लिए। *पापी* - मुक्ति के लिए। *मानव* - मार्गदर्शन के लिए।🙏 🚩कहां भी गया है -🚩 *मलनिर्मोचनं पुंसां जलस्नानं दिने दिने।* *सकृद्गीताम्भसि स्नानं संसारमलनाशनम्॥* 🌍जल में प्रतिदिन किया हुआ स्नान मनुष्य के केवल शारीरिक मल का ही नाश करता है। परंतु यदि कोई श्रीमद्भागवतमहापुराण रूपी दिव्य जल में एक बार भी स्नान कर ले, तो उसके संसार रूपी मल का पूर्ण नाश हो जाता है।🌍 👩‍❤️‍👩प्रत्येक जीव, प्रत्येक आत्मा इस संसार में अज्ञानता और अपने कर्मों के कारण जन्म-मरण के चक्र में फँसा हुआ है। उसे न चाहते हुए भी बार-बार जन्म लेना पड़ता है, मरना पड़ता है, वृद्धावस्था को प्राप्त करना पड़ता है और व्याधि-रोगों को सहना पड़ता है। जन्म, मृत्यु, जरा और व्याधि का यह बारंबार चलने वाला चक्र ही *संसार-मल कहलाता है।* 👩‍❤️‍👩 🛐बस आवश्यकता इस बात की है कि हम श्रीमद्भागवत को आज के संदर्भ में समझें और इसके दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाएँ।इसलिए हे सभी मनुष्यो! श्रीमद्भागवतमहापुराण अवश्य पढ़ें। यह केवल कथा नहीं, जीवन को सफल, शांत और दिव्य बनाने का सनातन मार्ग है।🛐 🍀*नोट -* प्रभु की असीम कृपा से श्रीमद्भागवतमहापुराण का शुभारंभ हो चुका है। मंगलाचरण का दिव्य पाठ आप सभी तक पहले ही पहुँचा दिया गया है। अब कल से हम सभी मिलकर प्रथम स्कन्ध के प्रथम अध्याय का पावन अध्ययन आरंभ करेंगे। आइए, इस दिव्य यात्रा में सम्मिलित हों और भगवान की लीलाओं के अमृत का रसास्वादन करें।🍀 🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏
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